Posts

Showing posts with the label nasa

क्‍या चांद पर दोबारा जा सकेगा इंसान? Nasa आर्टेमिस 1 मिशन की रिहर्सल शुरू, देखें लाइव

Image
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) एकबार फ‍िर से इंसान को चंद्रमा पर भेजना चाहती है। उसने इसके लिए आर्टेमिस मिशन तैयार किया है। आर्टेमिस 1 (Artemis 1) इसकी शुरुआत होगा। इस मिशन के लिए नासा अबतक का सबसे पावरफुल रॉकेट तैयार कर चुकी है। इसका नाम स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट है। दो महीने पहले यानी अप्रैल में अंतरिक्ष एजेंसी ने इस रॉकेट को वेट ड्रेस रिहर्सल की प्रक्रिया से गुजारा था। इस प्रक्रिया में रॉकेट को टेस्‍ट किया जाता है। हालांकि तकनीकी खामियां सामने आने की वजह से वेट ड्रेस रिहर्सल पूरी नहीं हो पाई। मिशन को लॉन्‍च करने के लिए इस रॉकेट का वेट ड्रेस रिहर्सल पूरा करना जरूरी है। यही वजह है कि एक बार फ‍िर से नासा इस मिशन के लिए यह रिहर्सल दोहराने जा रही है।     रिपोर्टों के अनुसार, वेट ड्रेस रिहर्सल टेस्ट शुरू करने के लिए फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर में मिशन टीम ने लॉन्च कंट्रोल सेंटर में अपने स्टेशनों की जांच की। रिहर्सल की उल्‍टी गिनती शुरू हो गई है। करीब 45 घंटे बाद यानी कल दोपहर 12.10 बजे रॉकेट को परखा जाएगा। ध्‍यान रहे कि वेट ड्रेस रिहर्सल वह प्रक्रिया है, जिसम...

चीन निकला NASA से दस कदम आगे, बना रहा दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे पावरफुल टेलीस्कोप!

Image
दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला देश अब दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप भी लगाने की तैयारी कर चुका है। चीन और अमेरिका का तनाव किसी से छुपा नहीं है लेकिन तकनीकी के मामले में भी चीन अमेरिका से पीछे नहीं रहना चाहता है। चीन अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा से 10 कदम आगे निकलने की तैयारी कर चुका है और सब उसके प्लान के मुताबिक हुआ तो वह दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्कोप जल्द ही स्थापित करने में कामयाब हो जाएगा। चीन ने इसे वेरी लार्ज एरिया गामा रे स्पेस टेलीस्कोप (Very Large Area gamma-ray Space Telescope) का नाम दिया है। इसका संक्षिप्त नाम VLAST रखा गया है। टेलीस्कोप का कुछ हिस्सा बनकर तैयार भी हो चुका है।  South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे बड़ा गामा-रे स्पेस टेलीस्कोप बनाना शुरू किया है जिसके जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है। नानजिंग पर्पल माउंटेन ऑब्जर्वेटरी, हेफई यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस और लेनझू इंस्टिट्यूट ऑफ मॉडर्न फिजिक्स के शोधकर्ता इस प्रोजेक्ट को मिलकर तैयार कर रहे हैं। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तकनीकी रूप से यह टेलीस्कोप कितना एडवा...

45 साल तक स्पेस डेटा भेजने वाले Voyager स्पेस क्राफ्ट की पावर हो रही खत्म, NASA ने जताया साथ छूटने का दुख!

Image
नासा ने 45 साल पहले जो स्पेस क्राफ्ट अंतरिक्ष में छोड़े थे, अब उनका सफर जल्द ही थम जाएगा क्योंकि स्पेस क्राफ्ट की पावर खत्म होने वाली है। इन्हें वोयेजर (Voyager) स्पेस क्राफ्ट के नाम से जाना जाता है जो आज से 44.5 साल पहले अंतरिक्ष में स्थापित किए गए थे। उस वक्त नासा ने जुड़वां स्पेस क्राफ्ट पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए थे। अब दोनों ही स्पेस क्राफ्ट पावर शॉर्टेज के चलते बंद होने वाले हैं।  NASA ने एक रिपोर्ट में बताया है कि उसने 1977 में Voyager स्पेस व्हीकल 1 और व्हीकल 2 को अंतरिक्ष में छोड़ा था। इनमें से व्हीकल 1 अपनी मियाद से बहुत ज्यादा चल चुका है। नासा का कहना है कि जितने साल यह व्हीकल चल पाया है उतना मानव के द्वारा बनाया गया कोई और दूसरा स्पेस व्हीकल नहीं चला है। लेकिन जल्द ही यह व्हीकल इतिहास बन जाएगा। साइंटिफिक अमेरिकन (Scientific American) की रिपोर्ट कहती है कि अब व्हीकल का सफर खत्म होने का समय आ गया है और जल्द ही यह अलविदा कह देगा।  जॉन हॉकिंस यूनिवर्सिटी के राल्फ मैकनट रिपोर्ट में कहते हैं, "इस बात को बीते साढ़े 44 साल हो चुके हैं। व्हीकल की जितनी वारंटी हमने दी ...

भयंकर ठंड और खराब सेंसर के साथ NASA के हेलीकॉप्‍टर ने मंगल ग्रह पर पूरी की 29वीं उड़ान

Image
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का इन्जनूअटी (Ingenuity) हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर जीवन के निशान ढूंढने का काम कर रहा है। कुछ समय पहले इसने वहां की विषम परिस्थितियों में 25वीं उड़ान भरी थी। नासा का यह ड्रोन नुमा हेलीकॉप्‍टर अब अपनी 29वीं उड़ान पूरी कर चुका है। यह उड़ान ग्रह पर बढ़ती ठंड के बीच पूरी हुई है, जिससे इस हेलीकॉप्‍टर के नेविगेशन सेंसर भी काम नहीं कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, 29वीं उड़ान में इस हेलीकॉप्‍टर ने 66.6 सेकंड में 179 मीटर की दूरी तय की और 5.5 मीटर प्रति सेकंड की गति से यात्रा की। हालांकि इस मिशन से जुड़ी टीम का कहना है कि मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर रीजन में हेलीकॉप्‍टर के लिए स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है। तापमान में गिरावट इसके उपकरणों की मुश्किल बढ़ा रही है।  हेलीकॉप्‍टर के लिए उसके नेव‍िगेशन सेंसर बहुत महत्‍वपूर्ण होते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि Ingenuity के नेविगेशन सेंसर लगभग एक सप्ताह पहले खराब हो गए थे। Ingenuity को इस ग्रह पर सिर्फ 5 फ्लाइट के लिए बनाया गया था, वह भी गर्मी के मौसम में। लेकिन नासा के इस हेलीकॉप्‍टर ने अपनी क्षमता से काफी ज्‍य...

NASA के यान ने मंगल ग्रह पर देखी चमकदार वस्तु, वैज्ञानिकों ने बताई सच्चाई

Image
NASA के पर्सीवरेंस रोवर (Perseverance Rover) ने मंगल ग्रह (Mars Planet) पर चमकते धातु जैसी दिखने वाली एक वस्तु की फोटो कैप्चर की है, जिसने साइंटिस्ट व रिसर्चर्स को हैरान कर दिया है। कैप्चर की गई तस्वीर को NASA ने सार्वजनिक रूप से शेयर भी किया, जिसमें चट्टानों के बीच में एक पत्थर जैसा ऑब्जेक्ट है, जो चमक रहा है। हालांकि, जब वैज्ञानिकों ने तस्वीर को बारीकी से जांचा, तो पाया कि ये पर्सीवरेंस रोवर द्वारा फैलाया हुआ कचरा था।  बीते बुधवार को, NASA के Perseverance Mars Rover ट्विटर हैंडल से ट्वीट की एक सीरीज पोस्ट की गई, जिसमें पर्सीवरेंस रोवर द्वारा मंगल ग्रह पर एक चमकने वाली वस्तु की फोटो को शेयर किया गया। इस तस्वीर में मंगल ग्रह पर चट्टानों के बीच एक वस्तु दिखाई दे रही है, जो सिल्वर रंग की चमक फेंक रही है। फोटो के साथ ही पोस्ट में कुछ जानकारियां भी दी गई है।   My team has spotted something unexpected: It's a piece of a thermal blanket that they think may have come from my descent stage, the rocket-powered jet pack that set me down on landing day back in 2021. pic.twitter.com/O4rIaE...

चांद पर नाम भेज रहा है NASA, आप भी यहां कर सकते हैं रजिस्टर

Image
नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने बीते रविवार को सोशल मीडिया पर अपने फॉलोअर्स के लिए एक जबरदस्त ऑफर निकाला, जिसके बाद स्पेस टेक्नोलॉजी फैन्स को चौंका दिया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने यूजर्स को Artemis I मिशन के जरिए लाखों लोगों का नाम चांद पर भेजने का फैसला लिया है, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन भी चालू है। इस घोषणा के साथ ही ट्विटर पर कई मजेदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। NASA ने ट्विटर पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि 3 मिलियन (30 लाख) लोगों के नाम को Artemis I के साथ चांद पर ले जाया जाएगा। स्पेस एजेंसी ने लिखा, (अनुवादित) "आप अपना नाम चंद्रमा पर भेज सकते हैं। कैसे? अपना बोर्डिंग पास प्राप्त करने के लिए साइन अप करें और इस वर्ष #Artemis I पर चंद्रमा के चारों ओर उड़ने वाले लगभग 3 मिलियन "यात्रियों" में शामिल हों। " इस पोस्ट में एक वीडियो भी है, जिसमें चंद्रमा घूमता दिखाई दे रहा है।   Artemis I मिशन में 30 लाख लोगों के नामों को एक फ्लैश ड्राइव में स्टोर करके स्पेस में ले जाया जाएगा। आप अपने नाम को रजिस्टर कराने के लिए इस वेबसाइट पर जा सकते हैं और अपना नाम...

स्पेस में हुआ हादसा, टेलीस्कोप से टकराया उल्का पिंड

Image
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space) के प्राइमरी मिरर (दर्पण) सेगमेंट्स में से एक के साथ बेहद छोटे मेटियोरॉइड की टक्कर हुई, जिसके बाद वह मिरर क्षतिग्रस्त हो गया। NASA ने खुद इस बात की जानकारी शेयर की और साथ ही यह भी बताया कि टेलीस्कोप अभी भी कम पर लगी हुई है। यह घटना 23 मई से 25 मई के बीच हुई, लेकिन अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इसकी जानकारी पिछले हफ्ते शेयर की। नासा का कहना है कि टेलीस्कोप अभी भी ठीक परफॉर्म कर रहा है और डेटा में "मामूली रूप से पता लगाने योग्य" प्रभाव के बावजूद सभी मिशन आवश्यकताओं को अच्छे से पूरा कर रहा है। NASA ने ब्लॉग के जरिए बताया कि 23 मई से 25 मई के बीच James Webb Space के प्राइमरी मिरर से एक बेहद छोटा मेटियोरॉइड टकराया था। नासा ने बताया "अंतरिक्ष में Webb के पूरे जीवनकाल में प्रभाव जारी रहेगा; जमीन पर मिरर का निर्माण और परीक्षण करते समय ऐसी घटनाओं का अनुमान लगाया गया था।"    अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि Webb के मिरर को माइक्रोमेटियोरॉइड से बमबारी का सामना करने के लिए इंजीनियर किया गया था, क्योंकि यह जिस वातावरण की परिक्रमा करता है व...

मंगल ग्रह पर दिखे पत्‍थरों के गेट, क्‍या एलियंस का घर है? जानें सच्‍चाई

Image
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने साल 2011 में क्यूरियोसिटी रोवर (Curiosity rover) को मंगल ग्रह पर भेजा था। यह वहां गेल क्रेटर रीजन में रहकर खोजें कर रहा है। इन्‍हीं खोजों से हमें कई बार हैरान करने वाली तस्‍वीरें मिलती हैं। पिछले दिनों यह रोवर मंगल ग्रह पर एक ‘दरवाजे' तक पहुंचा था, जिसे देखकर ऐसा लगा कि यह एलियंस का दरवाजा है। हाल में इसने एक और इमेज भेजी। इसमें पत्‍थरों के गेट टावरनुमा आकृति में दिखाई दे रहे थे। तस्‍वीर ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। सवाल उठा कि क्‍या इसका दूसरी दुनिया से कोई कनेक्‍शन है? हालांकि एक्‍सपर्ट का कहना है कि ये टावर संभवत: सीमेंट जैसे मटीरियल से बने थे, जो कभी मंगल ग्रह की चट्टान की दरारों को भरते थे।  रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह के रॉक फॉर्मेशन गेल क्रेटर रीजन के इतिहास के बारे में ज्‍यादा जानकारी दे सकते हैं। क्यूरियोसिटी रोवर इसमें अहम भूमिका निभा सकता है। यह पिछले 10 साल से मंगल ग्रह पर अपने मिशन पर है और गेल क्रेटर रीजन में पहाड़ों पर चढ़ सकता है। यह वहां की जियोलॉजी, इतिहास और वातावरण के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह नासा की मार...

मंगल पर आई सर्दी, -80 डिग्री की गला देने वाली ठंड में नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब

Image
मंगल ग्रह की सतह को टटोल रहे नासा के Ingenuity हेलिकॉप्टर के सामने एक समस्या खड़ी हो गई है। इसका एक सेंसर खराब हो गया है जिससे ऑपरेशन में खलल पैदा हो गया है। इस हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट ने बताया कि मंगल के चुनौतीपूर्ण वातावरण में हेलिकॉप्टर का सेंसर खराब हो गया है और उसके ठीक हुए बिना मिशन में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।  NASA के मंगल मिशन पर गए Ingenuity हेलिकॉप्टर ने पिछले दिनों मंगल पर अपनी उड़ान की एक वीडियो भेजी थी जिसे नासा ने शेयर भी किया था। हेलिकॉप्टर ने मंगल की सतह का अद्भभुत नजारा दिखाया था। अब हेलिकॉप्टर के चीफ पायलेट Havard Grip ने एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए जानकारी दी है कि इसका सेंसर खराब हो गया है। इसे इनक्लिनोमीटर (inclinometer) कहा जाता है। इसे ठीक करने के लिए एक कम्प्यूटर पैच की जरूरत होगी।  Ingenuity हेलिकॉप्टर मंगल पर फरवरी 2021 से गया हुआ है जिसके साथ नासा का पर्सेवरेंस रोवर भी है। तब से लेकर अब तक इसने मंगल की सतह पर 28 उड़ानें भरी हैं, जबकि इससे कम उड़ानें ही धरती से प्लान करके भेजा गया था। नासा को इसे भेजने के पीछे पहला मकसद ये जानना था कि क्या कोई हेलिकॉप्टर मंगल...

एलियन या UFO का रहस्य पता करने के लिए NASA बना रही वैज्ञानिकों की स्पेशल टीम

Image
NASA ने गुरूवार को कहा कि वह वैज्ञानिकों की एक ऐसी टीम बनाने जा रही है जो आकाश में होने वाली अजब या अनजानी घटनाओं की जांच करेगी, जिन्हें UFO कहा जाता है। अमेरिकी सरकार इस मुद्दे को अब गंभीरता से लेने लगी है।  अमेरिकी स्पेस एजेंसी का कहना है कि टीम का फोकस उपलब्ध डेटा की पहचान करने पर रहेगा। ताकि भविष्य के डेटा को इकट्ठा किया जा सके और इन घटनाओं को जांचने के लिए उस जानकारी का इस्तेमाल किया जा सके। नासा ने इसके लिए प्रिंसटॉन यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रमुख डेविड स्पेरगेल को अप्रोच किया है, जो टीम का नेतृत्व करेंगे। इसके अलावा इस टीम में डेनिअल इवांस भी होंगे जो नासा के साइंस मिशन डायरेक्ट्रेट के सीनियर रिसर्चर हैं।  नासा का कहना है कि वो इस मिशन में हजारों लाखों डॉलर खर्च करने वाली है जो कम से कम $ 100,000 (लगभग 7,782,500 रुपये) होगा।  घोषणा अमेरिकी सरकार द्वारा एक रिपोर्ट जारी करने के एक साल बाद आई है, जिसे नौसेना के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स के साथ मिलकर नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के ऑफिस द्वारा संकलित किया गया है। इसमें ज्यादातर अज्ञात हवाई घटनाओं की नौसेना कर्मियों द्वारा टिप्पणिया...

3 खरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित गैलेक्सी से वैज्ञानिकों को मिल रहे हैं अजब सिग्नल!

Image
3 खरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक गैलेक्सी से निकलते फास्ट रेडियो बर्स्ट (FRB) ने खगोल वैज्ञानिकों को चकरा दिया है। ये रेडियो वेव्ज़ के बर्स्ट होते हैं जो मिलिसेकंड जितने लम्बे होते हैं। ये रेडियो बर्स्ट पैदा होते हैं लेकिन दोहराते नहीं हैं। हालांकि, लेटेस्ट ऑब्जर्वेशन में रेडियो बर्स्ट को दोहराते हुए पाया गया है। खगोल वैज्ञानिकों ने FRB 190520 नाम की एक वस्तु का 20 मई 2019 में पता लगाया था।  इसकी लोकेशन का पता चीन में फाइव हंडरेड मीटर अपर्चर स्फेरिकल रेडियो टेलीस्कोप (FAST) के द्वारा लगाया गया था। उसके बाद यह रेडियो बर्स्ट नवंबर में टेलीस्कोप डेटा में सामने आया। FRB 190520 के बारे में आगे स्टडी करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि यह तेजी से रिपीट होने वाला रेडियो वेव्ज़ का बर्स्ट है। इस स्टडी को Nature जर्नल में एक नई रिपोर्ट के तहत प्रकाशित किया गया है।  2020 में वैज्ञानिकों की टीम ने National Science Foundation के Karl G. Jansky Very Large Array (VLA) और दूसरे टेलीस्कोप का इस्तेमाल किया और इसे लोकेट किया। लोकेट करने के बाद हवाई के Subaru Telescope ने इसकी और ज्यादा साफ तस्वीर पेश की। स...

नासा के वैज्ञानिक का कमाल, 'गुनगुना' उठा महासागर!

Image
नासा के एक वैज्ञानिक ने अजब कारनाम कर दिखाया है। वैज्ञानिक ने स्पेस से दिख रहे समुद्र के रंगों के डेटा को म्यूजिक नोट के साथ मिला दिया है। इसके लिए वैज्ञानिक और उसके भाई ने 18 महीने तक लगातार काम करके एक ऐसा ऑनलाइन प्रोग्राम बनाया जो समुद्र के कलर डेटा को म्यूजिकल नोट्स के साथ जोड़ देता है जिससे एक मधुर संगीत पैदा होता है। यानि कि, कोई नदी जब समुद्र में मिलती है तो उस स्थान को ऊपर से देखने पर नदी और सागर के रंगों में बदलाव दिखता है। ये रंग हर जगह पर अपना एक डेटा बनाते हैं। NASA के Goddard Space Flight Center के वैज्ञानिक रोज इस महासागरीय इमेजरी को स्टडी करते हैं। इस खूबसूरत इमेजरी को नासा के वैज्ञानिक रयान वेंदरम्यूलिन ने संगीत की जुबान देने की सोची।  "हम एक ऐसी कहानी बताना चाहते थे जो हमारे समुद्र की कनेक्टिविटी को सुने जा सकने वाले अनुभव में बयां करती हो। इसके लिए हमने म्यूजिक का इस्तेमाल किया क्योंकि यह ज्यादा आकर्षक और डाइनेमिक लगता है, और हमें कई तरह के बैकग्राउंड्स से जोड़ने की क्षमता रखता है।" NASA के Goddard Space Flight Center के वैज्ञानिक रयान वेंदरम्यूलिन ने ए...

आज पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरेगा विशाल एस्ट्रॉयड, NASA को सता रही है चिंता

Image
190 फीट चौड़ा एक एस्टेरॉयड जल्द ही पृथ्वी के पास आने वाला है और NASA ने इसके आगमन की घोषणा कर दी है। आपको बता दें, यह एस्टेरॉयड रोम में स्थित कोलोसियम (157 फीट) से बड़ा है। अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, बुधवार, 8 जून को एस्टेरॉयड हमारे ग्रह के सबसे करीब पहुंच जाएगा। एस्टेरॉयड का पृथ्वी के करीब से गुजरना असामान्य नहीं है। इससे पहले सोमवार को 160 फीट लंबा एक एस्टेरॉयड पृथ्वी के करीब पहुंच गया था। हालांकि, अपकमिंग एस्टेरॉयड थोड़ी चिंता बढ़ा रहा है। बुधवार को आने पर इस बड़े एस्टेरॉयड का हमारे ग्रह पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। NASA ने एस्टेरॉयड 2022 KV1 को 'नियर-अर्थ ऑब्जेक्ट' (NEO) के रूप में लेबल किया है। एस्टेरॉयड की यह कैटेगरी पृथ्वी के लिए खतरा पैदा कर सकती है और नासा द्वारा लगातार इसपर निगरानी रखी जा रही है। पृथ्वी के लिए एस्टेरॉयड का निकटतम फ्लाईबाई 2,660,000 मील/घंटा की दूरी पर होगा। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने एस्टेरॉयड के बारे में अधिक जानकारी का खुलासा किया है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस एस्टेरॉयड को पहली बार 2022 में खोजा गया था। NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी...

NASA ने शेयर किया बादलों से घिरे Jupiter का अद्भुत वीडियो, आप भी देखें

Image
NASA ने अपने जूनोकैम द्वारा लिए गए अदभुत तस्वीरों के जरिए एक अनिमेशन तैयार किया है, जिसमें बृहस्पति ग्रह (Jupiter) बादलों से ढका नजर आ रहा है।  अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इस वीडियो को सभी के साथ शेयर भी किया है। यह एक तरह का टाइमलैप्स एनिमेशन है। एजेंसी ने जानकारी दी कि 9 अप्रैल, 2022 को, नासा के जूनो अंतरिक्ष यान (Juno Spacecraft) ने बृहस्पति के अपने 41वें क्लोज फ्लाईबाई को पूरा किया और उस समय, इसके जूनोकैम ने बृहस्पति को इस तरह कैप्चर किया कि मानो आप खुद अपनी आखों से उसे देख रहे हो। NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL) ने अपने Instagram अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें जुपिटर को नजदीक से दिखाया गया है। छोटे से एनिमेटिड वीडियो में जुपिटर ग्रह बादलो से ढका हुआ दिखाई दे रहा है। खबर लिखते समय तक, इस वीडियो को 2,82,000 बार देखा जा चुका था। वीडियो को NASA के जूनो स्पेसक्राफ्ट में लगे जूनोकैम द्वारा ली गई तस्वीरों को जोड़ कर बनाया गया है।    पोस्ट के कैप्शन में लिखा है, (अनुवादित) "9 अप्रैल, 2022 को @nasa के जूनो अंतरिक्ष यान ने #Jupiter का 41वां नजदीकी फ्लाईबाई पूरा किया। इसके ...

धूमकेतु (Comet) क्या होते हैं, कहां से आते हैं, क्या ये धरती से टकरा सकते हैं? NASA ने दिए चौंकाने वाले जवाब

Image
हम अपने सौरमंडल के बारे में जानते हैं कि इसके ग्रह सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि सौरमंडल में ग्रहों के अलावा भी लाखों ऐसे खगोलीय पिंड हैं जो बर्फ और धूल के बने हैं। इन्हें धूमकेतु (Comet) कहा जाता है। NASA कहती है कि धूमकेतु भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और ये धूल और बर्फ से बने बड़े बड़े खगोलीय पिंड होते हैं। अंतरिक्ष एजेंसी कहती है कि धूमकेतु आज से लगभग 4.6 खरब साल पहले बने थे जब सौरमंडल का निर्माण हुआ था। इन्हें इनकी जलती हुई या चमकती हुई पूंछ के कारण अधिक जाना जाता है।  आपके मन में भी यह सवाल आता होगा कि आखिर ये धूमकेतु आते कहां से हैं? नासा का कहना है कि ये सौरमंडल के मध्य में मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो नेप्च्यून ग्रह के ऑर्बिट के बाहर भी पाए जाते हैं। इनमें से कुछ तो छोटे ऑर्बिट लाइफ वाले कॉमेट होते हैं जो सूरज का एक चक्कर लगाने में 200 साल का समय लेते हैं। दूसरे कॉमेट सौर मंडल के बाहरी छोर पर घूमते हैं जिसे ऊर्ट क्लाउट (Oort Cloud) कहा जाता है। इनके बारे में एजेंसी का कहना है कि ये सूरज का एक चक्कर लगाने में 25 हजार साल तक का वक्...

ब्‍लू व्‍हेल से भी 3 गुना बड़ा एस्‍टरॉयड आ रहा हमारे करीब, 6 जून को होगा ‘सामना’

Image
एस्‍टरॉयड जिज्ञासा जगाते हैं, जब ये पृथ्‍वी के पास से गुजरते हैं। कुछ ऐसा ही फ‍िर होने जा रहा है। नासा के अनुसार, ब्लू व्हेल से भी तीन गुना बड़ा एक एस्‍टरॉयड सोमवार को 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्‍वी के ऊपर से गुजरेगा। रिपोर्टों के अनुसार, 2021 GT2 नाम का यह एस्‍टरॉयड हमारी पृथ्‍वी से 35 लाख किलोमीटर की दूरी से पास होगा। यह पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी का 10 गुना है। इस हिसाब से यह माना जा सकता है कि यह एक सुरक्षित सफर होगा, जिसका पृथ्‍वी पर कोई असर दिखने की उम्‍मीद नहीं है।   हाल ही में एक और एस्‍टरॉयड- 7335 (1989 JA) भी पृथ्‍वी के करीब से गुजरा था। इसे संभावित रूप से खतरनाक की कैटिगरी में रखा गया था। यह इस साल का अबतक का सबसे बड़ा एस्‍टरॉयड था, जिसने हमारी पृथ्‍वी के पास से सफर किया।   बात करें एस्‍टरॉयड 2021 GT2 की, तो इस अंतरिक्ष चट्टान का पता पिछले साल लगा था। अनुमान है कि इसका आकार 121 से 272 फीट के बीच है। आसानी से समझने के लिए इसकी लंबाई एक ब्लू व्हेल की लंबाई से तीन गुना तक ज्‍यादा हो सकती है। क्‍योंकि यह साइज में बहुत बड़ा नहीं है, इसीलिए इसे पृथ...

Nasa ने खोज निकाला ‘नर्क’! जल्‍द नजर आएगी जलती दुनिया की पहली झलक

Image
अगले कुछ हफ्तों में दुनिया दो ऐसे ग्रहों को देख सकती है, जो कहने के लिए तो ‘सुपर अर्थ' हैं, पर किसी ‘नर्क' से कम नहीं हैं। अंतरिक्ष में तैनात दुनिया का सबसे बड़ा टेलीस्‍कोप- जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप इन ग्रहों को सामने ला सकता है। ये दोनों ‘सुपर अर्थ' हमसे 50 प्रकाश वर्ष दूर हैं। इनमें से एक ग्रह का नाम है ‘55 कैनरी ई' (55 Cancri e)। यह ग्रह अपने सूर्य के इतने करीब से चक्‍कर लगाता है कि इसकी सतह बेहद गर्म है। इतनी गर्म की आप इसे आग का गोला भी समझ सकते हैं।   रिपोर्टों के अनुसार, ‘55 कैनरी ई' अपने तारे से 15 लाख मील से भी कम दूरी पर स्थित है। नासा के मुताबिक, यह दूरी हमारे सूर्य और बुध ग्रह के बीच की दूरी का भी 1/25वां भाग है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह ग्रह कितना गर्म होगा। माना जाता है कि यह ग्रह गर्म लावा के सागरों से ढका हुआ है। इसकी सतह का तापमान बेहिसाब हो सकता है, जो बुध ग्रह के तापमान से भी कई गुना ज्‍यादा हो सकता है।  सोचिए अगर पृथ्‍वी अपने सूर्य के इतने करीब होती, जिसमें एक साल का समय कुछ घंटों में ही पूरा हो जाता। इतनी गर्म होती कि महासागर उबल र...

NASA के हेलीकॉप्टर ने मंगल ग्रह पर 25वीं उड़ान भर तोडा रिकॉर्ड, देखें वीडियो

Image
NASA का Ingenuity हेलीकॉप्टर मंगल ग्रह पर प्राचीन जीवन के निशान ढूंढने का काम कर रहा है और अब इसने कमजोर वातावरण में 25 उड़ानें भरने का रिकॉर्ड बनाया है। इंजीनियरों ने इस छोटे हेलीकॉप्टर को अपने साथी पर्सवेरेंस रोवर के साथ वन-वे ट्रिप पर भेजा जब पहली बार भेजा था, तो केवल पांच उड़ानों की प्लानिंग की थी, लेकिन Ingenuity ने अपनी 25वीं उड़ान भरके नया कीर्तिमान हासिल किया है। 8 अप्रैल को जब फ्लाइट ने उड़ान भरी, तो हेलीकॉप्टर ने पहले से कहीं ज्यादा तेज उड़ान भरी। इसने दूरी और स्पीड दोनों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। हेलीकॉप्टर 704 मीटर ऊंचा और 5.5 मीटर प्रति सेकंड की स्पीड से उड़ा। Ingenuity के ब्लैक-एंड-व्हाइट नेविगेशन कैमरे ने उड़ान के दौरान कुछ लुभावनी तस्वीरें भी कैप्चर की। नासा के इंजीनियरों ने उन्हें एक वीडियो में एक साथ जोड़ दिया है, जिसमें मंगल ग्रह के आसपास का दृश्य दिखाया गया है। Ingenuity ने 25वीं उड़ान के बाद से कुछ और उड़ानें भरी हैं। नासा ने कहा कि यह फिलहाल अपनी 29वीं उड़ान की तैयारी कर रहा है। Ingenuity टीम के प्रमुख Teddy Tzanetos ने कहा कि हेलीकॉप्टर के नेविगेशन कैमरे ने उन्हें...

अमेरिका की बड़ी तैयारी : 2027 तक अंतरिक्ष में न्‍यूक्लियर पावर सिस्‍टम को करेगा टेस्‍ट, यह है मकसद

Image
अमेरिका अपने स्‍पेस प्रोग्राम्‍स को अलग लेवल पर ले जाने के लिए काम कर रहा है। यह देश अब अंतरिक्ष में न्‍यूक्लियर पावर सिस्‍टम्‍स को इस्‍तेमाल करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट जिसे DIU के नाम से भी जाना जाता है, वह साल 2027 तक न्‍यूक्लियर पावर्ड प्रोटोटाइप की अंतरिक्ष में टेस्टिंग करने पर काम कर रही है। इसके लिए दो कंपनियों को कॉन्‍ट्रैक्‍ट भी सौंप दिया गया है। DIU ने जिन दो कंपनियों को चुना है, उनमें शामिल हैं एवलांच एनर्जी (Avalanche Energy) और अल्ट्रा सेफ न्यूक्लियर (Ultra Safe Nuclear)।  रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से एवलांच एनर्जी स्‍पेसक्राफ्ट के लिए बिजली क्षमताओं के साथ नेक्‍स्‍ट जेन न्‍यूक्लियर प्रोपल्‍शन का प्रदर्शन करेगी। दोनों कंपनियां मिलकर ऐसे टेस्‍ट सॉल्‍यूशन विकसित करेंगी, जिससे आने वाले समय में छोटे स्‍पेसक्राफ्ट को पृथ्‍वी से चंद्रमा के बीच में ऑपरेट किया जा सके। देश के डिफेंस डिपार्टमेंट को अंतरिक्ष में अपने कार्यक्रम आगे बढ़ाने के लिए ये कंपनियां हाई-पावर पेलोड भी डेवलप करेंगी।  DIU में न्‍यूक्लियर प्रोपल्‍शन एंड पावर के प्रोग्राम मैनेजर ...

अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन खोलेगी पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों का राज!

Image
अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (Nasa) ने पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में अबतक के सबसे बड़े टेलीस्‍कोप जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) को लॉन्‍च किया था। यह टेलीस्‍कोप वहां खुद को सेटअप करने की प्रक्रिया पूरी करने वाला है और जल्‍द अपना काम शुरू कर सकता है। खबरों की मानें, तो इस टेलीस्‍कोप ने एक नई चट्टानी दुनिया का पता लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि यह टेलीस्‍कोप 50 प्रकाश वर्ष दूर दो छोटे ग्रहों पर स्‍टडी करेगा।  space.com ने लिखा है कि मौजूदा टेलीस्‍कोप टेक्‍नॉलजी में गैसीय आवरण वाले ग्रहों के मुकाबले चट्टानी ग्रहों को देखना ज्‍यादा कठिन है। लेकिन जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप में लगे पावरफुल मिरर और डीप स्‍पेस लोकेशन की वजह से पृथ्‍वी से थोड़े बड़े दो ग्रहों को टटोलने का काम जल्‍द शुरू हो सकता है। खास बात यह है कि इन ग्रहों को ‘सुपर अर्थ' के रूप में जाना जाता है।    इन ग्रहों को भले ही सुपर अर्थ के तौर पर पहचाना  जाता है, लेकिन यहां जीवन मुमकिन नहीं है। इनमें से एक ग्रह तो बेहद गर्म लावा से ढका हुआ है, जिसका नाम 55 कैनरी ई है। वहीं दूसरे ग्रह का...