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स्पेस में हुआ हादसा, टेलीस्कोप से टकराया उल्का पिंड

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जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space) के प्राइमरी मिरर (दर्पण) सेगमेंट्स में से एक के साथ बेहद छोटे मेटियोरॉइड की टक्कर हुई, जिसके बाद वह मिरर क्षतिग्रस्त हो गया। NASA ने खुद इस बात की जानकारी शेयर की और साथ ही यह भी बताया कि टेलीस्कोप अभी भी कम पर लगी हुई है। यह घटना 23 मई से 25 मई के बीच हुई, लेकिन अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने इसकी जानकारी पिछले हफ्ते शेयर की। नासा का कहना है कि टेलीस्कोप अभी भी ठीक परफॉर्म कर रहा है और डेटा में "मामूली रूप से पता लगाने योग्य" प्रभाव के बावजूद सभी मिशन आवश्यकताओं को अच्छे से पूरा कर रहा है। NASA ने ब्लॉग के जरिए बताया कि 23 मई से 25 मई के बीच James Webb Space के प्राइमरी मिरर से एक बेहद छोटा मेटियोरॉइड टकराया था। नासा ने बताया "अंतरिक्ष में Webb के पूरे जीवनकाल में प्रभाव जारी रहेगा; जमीन पर मिरर का निर्माण और परीक्षण करते समय ऐसी घटनाओं का अनुमान लगाया गया था।"    अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि Webb के मिरर को माइक्रोमेटियोरॉइड से बमबारी का सामना करने के लिए इंजीनियर किया गया था, क्योंकि यह जिस वातावरण की परिक्रमा करता है व...

आज रात आसमान में हो सकती है शानदार उल्‍का बौछार, देख सकते हैं ऑनलाइन भी

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आसमान में होने वाली घटनाओं में दिलचस्‍पी रखने वाले लोगों के लिए आज और कल की रात बेहद अहम होने वाली है। 30-31 मई की रात में दुनिया एक उल्‍का बौछार (meteor shower) को एक्‍सपीरियंस कर सकती है। ताऊ हरक्यूलिड्स नाम की यह उल्‍का बौछार इसी नाम के एक तारे से आती है, जिसका मुख्‍य धूमकेतु (comet) SW3 है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) पिछले हफ्ते इस उल्‍का बौछार का अनुमान लगाया था। अगर आपके क्षेत्र में मौसम संबंधी रुकावटें हैं या फ‍िर आप रात को घर से बाहर नहीं निकलना चाहते, तब भी आप इस संभावित उल्‍का बौछार को अनुभव कर सकते हैं।   ताऊ हरक्यूलिड्स (tau Herculids) उल्का बौछार के बारे में कहा जाता है कि सोमवार की पूरी रात प्रति घंटे 1,000 ‘उल्‍का तूफान' दिखाई दे सकते हैं। इसकी वजह है कि पृथ्‍वी एक धूमकेतु SW3 के मलबे से गुजरने वाली है। हालांकि वैज्ञानिक इसके बारे में अभी तक पूरी तरह आश्‍वस्‍त नहीं हैं। अगर धूमकेतु का मलबा उससे अलग हो जाता है, तभी दुनिया एक बेहतरीन उल्‍का बौछार का अनुभव कर पाएगी। बताया जाता है कि यह पिछले 20 साल की सबसे बेहतरीन उल्‍का बौछार हो सकती है या फ‍िर कुछ भी ना द...

मंगल पर कभी था जीवन? वैज्ञानिकों ने स्टडी किया 1.3 अरब साल पुराना उल्का पिंड

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मंगल ग्रह के बारे में एक सवाल हर किसी के मन में उठता है। चूंकि यह पृथ्वी के करीबी ग्रहों में से है, तो क्या यहां पर कभी जीवन रहा होगा? वैज्ञानिकों को भी इस सवाल ने सालों से उलझाया हुआ है। इसके बारे में लगातार शोध जारी है। बहुत उम्मीद है कि इसके संबंध में एक निष्कर्षपूर्ण उत्तर वैज्ञानिक जल्द खोज लेंगे। नासा ने लक्ष्य रखा है कि मंगल ग्रह से सैम्पलों को 2030 तक धरती पर ले आएगी। ये ऐसे सैम्पल होंगे जिनसे मंगल ग्रह पर जीवन के सबूतों को पता लगाया जा सकेगा। हालांकि, वैज्ञानिक उल्का पिंडों के रूप में मंगल के पदार्थों की स्टडी कर रहे हैं। स्वीडन में Lund University में शोधकर्ताओं ने मंगल के 1.3 अरब साल पुराने उल्का पिंक को स्टडी किया है और पाया कि इसे पानी का सीमित एक्सपोजर मिला है। दूसरे शब्दों में, उस खास समय और जगह पर जीवन के होने की संभावना नहीं थी। वैज्ञानिकों ने न्यूट्रॉन और एक्स-रे टोमोग्राफी का इस्तेमाल किया। यह वही तकनीक है जो परसेवरेंस रोवर द्वारा लाए गए सैम्पलों को स्टडी करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। इस तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि वैज्ञानिक पता लगाना चाहते थे कि क...