Posts

Showing posts with the label ककष

कभी देखा है सूर्य को इतने करीब से? बुध ग्रह की कक्षा में जाकर 500 डिग्री तापमान में खींची गईं तस्‍वीरें

Image
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने साल 2020 में अपना सोलर ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा था। हाल ही में इसने सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींची हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 26 मार्च को ESA का सोलर ऑर्बिटर सूर्य के सबसे नजदीकी ग्रह बुध (Mercury) की कक्षा में पहुंचा। इस तरह की पहुंच को पेरिहेलियन (perihelion) के रूप में जाना जाता है, जिसमें कोई ग्रह सूर्य के सबसे करीब होता है। हालांकि अंतरिक्ष यान को पेरिहेलियन तक पहुंचने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इनमें सबसे बड़ी चुनौती भीषण गर्मी की थी। सोलर ऑर्बिटर जब सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचा तो उसे 500 डिग्री सेल्सियस तक तापमान का सामना करना पड़ा। इस दौरान हीट शील्ड ने उसे बचाकर रखा।  उम्मीद है कि फ्यूचर में सोलर ऑर्बिटर सूर्य के और करीब जाएगा और उसे ज्‍यादा तापमान का सामना करना पड़ेगा। इस कोशिश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि हमें सूर्य का वह रूप देखने को मिला है, जो आज से पहले कभी नहीं देखा गया। सूर्य के रिकॉर्ड करीब पहुंचकर ESA के ऑर्बिटर ने पावरफुल फ्लेयर्स, सौर ध्रुवों के शानदार दृश्य और एक रहस्यमयी सौर 'हे...

स्टारलिंक के 40 उपग्रह भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) के कारण कक्षा से नीचे गिरे

Image
First Published: February 11, 2022 | Last Updated:February 11, 2022 एलोन मस्क (Elon Musk) के स्टारलिंक (Starlink) ने दर्जनों उपग्रह खो दिए क्योंकि वे 3 फरवरी, 2022 को लॉन्च होने के बाद एक भू-चुंबकीय तूफान (geomagnetic storm) में फंस गए थे। मुख्य बिंदु  स्टारलिंक ने 49 उपग्रहों को लॉन्च किया था, जिनमें से 40 प्रभावित हुए। यह उपग्रह चालू होने से पहले ही कक्षा से नीचे गिर गये। फाल्कन 9 लॉन्चर के दूसरे चरण ने उपग्रहों को उनकी इच्छित कक्षा में पृथ्वी से लगभग 210 किमी ऊपर की परिधि के साथ तैनात किया। प्रत्येक उपग्रह ने नियंत्रित उड़ान हासिल की। लेकिन उपग्रह एक भू-चुंबकीय तूफान से प्रभावित हो गये। अंतरिक्ष में मलबे के निर्माण से बचने के लिए इन उपग्रहों को पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करते समय जलने के लिए डिज़ाइन किया गया था। सौर तूफान या फ्लेयर्स क्या हैं? सौर तूफान चुंबकीय प्लाज्मा होता है, जिन्हें सौर सतह से बड़ी गति से बाहर निकाला जाता है। वे चुंबकीय ऊर्जा की निकासी के दौरान आते हैं, जो सनस्पॉट (सूर्य पर अंधेरे क्षेत्रों) से जुड़े होते हैं। यह कुछ...

पृथ्‍वी की कक्षा शेयर करने वाला एक और ट्रोजन एस्‍टरॉयड मिला, 3500 साल तक निभाएगा साथ

Image
पृथ्वी की कक्षा को शेयर करने वाले दूसरे ट्रोजन एस्‍टरॉयड (Trojan asteroid) के बारे में अटकलें खत्‍म हो गई हैं। रिसर्चर्स ने कन्‍फर्म किया है कि यह सच्‍चाई है। खगोलविदों ने साल 2020 में पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले एक अन्‍य ट्रोजन एस्‍टरॉयड की खोज की थी। अब वैज्ञानिकों ने कन्‍फर्म किया है कि ट्रोजन एस्‍टरॉयड कोई असाधारण मामला नहीं है। यह छोटी अंतरिक्ष चट्टानें हैं, जो एक ग्रह के साथ ऑर्बिट शेयर करते हुए चक्कर लगाती हैं। ऐसे कई एस्‍टरॉयड को सौर मंडल के अन्य ग्रहों की परिक्रमा करते हुए खोजा गया है। पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा करने के मामले में अब तक एस्‍टरॉयड 2010 TK7 को इकलौता ट्रोजन एस्‍टरॉयड माना जाता था। अब ‘2020 XL5' नाम का ट्रोजन एस्‍टरॉयड भी इस ग्रुप में शामिल हो गया है। 2020 XL5 एस्‍टरॉयड की लंबाई लगभग 1.2 किलोमीटर है। यह 2010 TK7 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्‍यादा लंबा है। वैज्ञानिकों को यकीन है कि यह ट्रोजन एस्‍टरॉयड कम से कम 3500 साल तक इसी कक्षा में रहेगा और पृथ्‍वी के साथ-साथ सूर्य का चक्‍कर लगाता रहेगा।  2020 XL5 एस्‍टरॉयड को पहली बार दिसंबर 2020 में देखा गया था...

जेम्स वेब टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) अपनी कक्षा में पहुंचा

Image
First Published: January 29, 2022 | Last Updated:January 29, 2022 जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी की दूरी पर अपने अंतिम गंतव्य पर पहुंच गया है। यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष के एक क्षेत्र में परिक्रमा करेगा जिसे लैग्रेंज बिंदु (Lagrange point) के रूप में जाना जाता है, जहां सूर्य और पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण खिंचाव घूर्णन प्रणाली के केन्द्रापसारक बल (centrifugal force) द्वारा संतुलित किया जाता है। इन बिंदुओं को सबसे पहले इतालवी फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ-लुई लैग्रेंज (Joseph-Louis Lagrange) द्वारा सिद्धांतित किया गया था। जेम्स वेब टेलीस्कोप ( James Webb Telescope) इसे नासा, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया था। इसे एरियन रॉकेट से लॉन्च किया गया था। मील के पत्थर 13.7 अरब साल पहले बनी आकाशगंगाओं और तारों को स्कैन करने के लिए इस टेलीस्कोप लॉन्च किया गया है। इस टेलीस्कोप की कीमत 10 अरब डॉलर है। जेम्स वेब टेलीस्कोप की तैनाती टेलीस्कोप को अपने सही रूप में संरेखित होने (align) में 15 दिन लगे। इसम...