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हमारी आकाशगंगा के अंदर एक और गैलेक्‍सी? इस तस्‍वीर ने वैज्ञानिकों को भी हैरान किया

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रहस्‍यों से भरा हमारा ब्रह्मांड हर रोज कुछ नए आयाम पेश करता है। अब खगोलविदों ने हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक ऑब्‍जेक्‍ट को देखा है। यह एक छोटी सर्पिल आकार की आकाशगंगा लगती है। लेकिन ज्‍यादा संभावना इस बात की है कि यह एक तारा है। बताया जाता है कि यह तारा धूल से भरे गैलेक्टिक सेंटर में पृथ्‍वी से लगभग 26,000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है। यह तारा सूर्य से लगभग 32 गुना बड़ा है और वहां एक घूमती हुई गैस की विशाल डिस्‍क के अंदर बैठता है।  लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस डिस्‍क को ‘प्रोटोस्टेलर डिस्क' के रूप में जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रह्मांड में इस तरह की डिस्‍क व्‍यापक रूप से फैली हुई हैं। ये तारों के लिए फ्यूल का काम करती हैं और युवा तारों को लाखों साल में एक बड़ा और चमकीला सूरज बनने में मदद करती हैं। लेकिन खगोलविदों ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि एक आकार में एक छोटी आकाशगंगा दिखने वाली यह चीज हमारी आकाशगंगा के केंद्र में खतरनाक तरीके से परिक्रमा कर रही हो।  सवाल उठता है कि यह छोटी सर्पाकार आकृति कैसे आई और क्‍या ऐसी और भी हैं। नेचर एस्‍ट्रोनॉमी में प्रक...

इंसान अपने शरीर के इस अंग से भी ले सकते हैं सांस, जानकर रह जाएंगे दंग

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वैज्ञानिकों द्वारा तरह-तरह की स्टडी की जाती है, जिसमें कई ऐसे तथ्य सामने आते हैं, जो आपको चौंका सकते हैं। एक लेटेस्ट स्टडी में भी ऐसी जानकारी निकलकर सामने आई है, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे, या यूं कहो की आप उसे मानने के लिए शायद राजी भी न हो। वैज्ञानिकों की एक टीम ने पता लगाया है कि गुदा से सांस लेना संभव है। जी हां, आपने सही पढ़ा, इस स्टडी में दावा किया गया है कि यह खोज भविष्य में इंसानों की भी जान बचाने के काम आएगी। Science Direct ने MED में पब्लिश एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि गुदा से सांस लेना भी संभव है। वैज्ञानिकों के एक समूह ने कछुओं के धीमे मेटाबॉलिज्म के आधार पर सूअरों और चूहों पर कई प्रयोग किए। इसमें म्यूकोसल लाइनिंग को पतला करने के लिए जानवरों की आंतों को साफ किया गया, जिससे खून के प्रवाह में बाधा को कम किया जा सके। इसके बाद उन जानवरों को एक ऐसे कमरे में रखा गया जहां ऑक्सीजन नहीं थी। ऐसा माना जाता है कि क्योंकि कछुओं के पास इस तरह की परत होती है, वे अपने गुदा के जरिए सांस लेने में सक्षम होते हैं, जिसकी वजह से वो सर्दियों में जीवित रहने में सक्षम होते हैं। रिपोर्ट...

Elon Musk की SpaceX इस हफ्ते बनाएगी नया रिकॉर्ड, 3 दिन में लॉन्‍च होंगे 3 मिशन

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एलन मस्‍क की स्‍पेस कंपनी ‘स्‍पेसएक्‍स' (SpaceX) इस वीकेंड एक नया रिकॉर्ड बनाने को तैयार है। कंपनी 3 दिन में 3 लॉन्‍च पैड्स से 3 रॉकेट लॉन्‍च करने की हैट्रिक बनाने वाली है। इसकी उल्‍टी गिनती अब शुरू हो गई है। लॉन्चिंग आज यानी शुक्रवार से ही शुरू हो जाएगी। सबसे पहले फ्लोरिडा स्थित नासा (Nasa) के कैनेडी स्‍पेस सेंटर से 53 स्‍टारलिंक इंटरनेट सैटेलाइट्स को ऑर्बिट में स्‍थापित किया जाएगा। इसके बाद शनिवार को कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्‍पेस फोर्स बेस से जर्मन सेना के लिए एक रडार सैटेलाइट को लॉन्‍च किया जाएगा। तीसरा मिशन फ्लोरिडा से ही है, जहां केप कैनावेरल स्‍पेस फोर्स स्‍टेशन से एक कमर्शल कम्‍युनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्‍च किया जाएगा।     मिशन सफल होता है, तो यह स्‍पेसएक्‍स की बैक टु बैक 3 उड़ानों को दर्शाएगा। हालांकि कंपनी ने इस साल की शुरुआत में 31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच 3 मिशन लॉन्‍च किए थे, लेकिन वह बैक टु बैक नहीं थे। कंपनी ताजा लॉन्‍च के जरिए नया रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्‍य लेकर आगे बढ़ रही है।  शुक्रवार का मिशन फाल्‍कन 9 रॉकेट के जरिए पूरा करने की तैयारी है। इसे स्टारलिंक 4-19 क...

53 साल पहले चंद्रमा से लाई गई जिस मिट्टी को कॉकरोचों ने खाया था वह नीलाम होगी, जानें इस अनोखे ऑक्‍शन के बारे में

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एक ऑक्शन हाउस चांद की धूल की नीलामी कर रहा है। चांद की इस मिट्टी को पृथ्वी पर 1969 में Apollo 11 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा लाया गया था। Apollo 11 नासा का पहला स्पेस मिशन था, जिसमें इंसानों को पृथ्वी से बाहर ले जाया गया था। खास बात यह है कि चंद्रमा से लाई गई इस धूल को कॉकरोच के पेट से निकाला गया था। ऑक्शन हाउस ने जानकारी दी है कि नीलामी में चंद्रमा की धूल (Moon dust) के साथ-साथ तीन कॉकरोच भी मिलेंगे, जिनके पेट से इस धूल को निकाला गया है। आप सोच रहे होंगे कि चांद से आई मिट्टी कॉकरोच तक कैसे पहुंची। दरअसल, कॉकरोच को यह मिट्टी खिलाई गई थी।  RR Auction नाम के एक ऑक्शन हाउस ने जानकारी दी है कि मून डस्ट की नीलामी की बिडिंग शुरू हो गई है। कॉकरोच के द्वारा खाई गई इस धूल का ऑक्शन इस हाउस की सबसे दुर्लभ नीलामियों में से एक है। ऑक्शन हाउस का कहना है कि इस ऑक्शन की बिडिंग 23 जून तक चलेगी। RR Auction के कार्यकारी वाइस प्रेसिडेंट बॉबी लिविंगस्टन ने Collect Space पब्लिकेशन को बताया "जब भी हम अपोलो 11 से किसी चीज का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से रोमांचकारी होता है, क्योंकि...

समुद्र के नीचे फट गया ज्‍वालामुखी, इसे Nasa ने ‘शार्ककैनो’ क्‍यों कहा? जानें सबकुछ

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) हमें ना सिर्फ स्‍पेस के रहस्‍यों से रू-ब-रू करवाती है, बल्कि पृथ्‍वी में होने वाली घटनाओं की भी साक्षी बनाती है। वीडियो और इमेजेस के जरिए हम दुनिया को नए नजरिए से देख पाते हैं। इसी क्रम में नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर ने प्रशांत महासागर में पानी के नीचे हुए ज्वालामुखी विस्फोट की तस्वीर ट्वीट की है। बात यहीं खत्‍म नहीं होती। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस घटना को शार्ककैनो (Sharkcano) कहा है। इसकी वजह यह है कि जिस जगह ज्‍वालामुखी में यह विस्‍फोट हुआ है, वहां शार्क की दो प्रजातियां रहती हैं यानी यह जगह उनका निवास है। इस तस्‍वीर को लैंडसेट-9 सैटेलाइट ने क्लिक किया है, जो बताती है कि मौजूदा जगह पर समुद्र में काफी हलचल है।  नासा ने बताया है कि सोलोमन द्वीप में कवाची ज्वालामुखी शार्क की दो प्रजातियों का घर है। एजेंसी के मुताबिक, यह इलाका प्रशांत क्षेत्र में सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। इन्‍हीं में से एक ज्‍वालामुखी को जो पानी के अंदर है, लैंडसैट-9 ने फटते हुए देखा है। नासा ने ट्विटर पर इससे जुड़ीं इमेजेस शेयर की हैं और लिखा है, क्‍या ...

इस महीने लॉन्‍च होगा Boeing का स्टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट, लेकिन सप्‍लायर से हुआ टकराव

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अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां एक-दूसरे से मुकाबला कर रही हैं। इनमें बोइंग (Boeing) भी शामिल है, जो एक मानव रहित अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल की टेस्टिंग करने और स्‍पेस सेक्‍टर में अपनी प्रतिष्‍ठा को बेहतर बनाने में लगी है। हालांकि कंपनी का एयरोजेट रॉकेटडाइन के साथ टकराव सामने आया है, जो उसके स्‍पेसक्राफ्ट के लिए एक प्रमुख सप्‍लायर है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मिशन बोइंग एक सीधी चुनौती है एलन मस्‍क की स्‍पेसएक्‍स के लिए। इसके जरिए बोइंग खुद को एक प्रतिद्वंदी के तौर पर स्‍थापित करना चाहती है।  इसी क्रम में 19 मई को CST-100 स्टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन के लिए एटलस 5 रॉकेट के ऊपर लॉन्‍च किया जाना है। बोइंग, नासा को यह दिखाना चाहती है कि उसका स्‍पेसक्राफ्ट, अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षि‍त है।   बोइंग और एयरोजेट के बीच स्‍टारलाइनर के प्रोपल्‍शन सिस्‍टम को लेकर टकराव हुआ था। इस वजह से पिछले साल जुलाई में एक टेस्‍ट फ्लाइट को कैंसल करना पड़ा। इसके लिए दोनों कंपनियों ने एक-दूसरे को जिम्‍मेदार बताया। स्‍पेस सेक्‍टर की दुनिया में बोइंग पहले से ह...

कौन कहता है अंतरिक्ष में साउंड नहीं, ब्‍लैक होल से आने वाली इस आवाज को सुनिए

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ब्रह्मांड में होने वाली गतिविधियां हर बार हमें एक नई जानकारी देती हैं। क्‍या आपने कभी किसी ब्‍लैकहोल से निकलने वाले साउंड के बारे में पढ़ा है। ब्‍लैक होल, जिनके बारे में हम यह समझते आए हैं कि उनमें गुजरकर प्रकाश भी गायब हो जाता है, वह साउंड भी जनरेट कर सकते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने हाल ही में पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में एक ब्लैक होल से निकलने वाली साउंड क्लिप को रिलीज किया है। इसमें ब्‍लैक होल से निकलने वाले साउंड को सुना जा सकता है।  रिपोर्टों के अनुसार, साल 2003 से इस ब्‍लैक होल को पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में देखा जा रहा है। खगोलविदों ने इसकी वजह का भी अनुमान लगया है। उनका कहना है कि ब्‍लैक होल जिन प्रेशर वेव्‍स को भेजता है, उनसे इस आकाशगंगा की गर्म गैसों में तरंगें पैदा होती हैं। यह साउंड में बदलने लगती हैं। हालांकि हम इसे सीधे कानों से नहीं सुन सकते। यह सब तकनीक के जरिए हमारे सामने आया है।   यह सब मुमकिन हुआ है सोनिफिकेशन के जरिए। यह नासा की चंद्रा एक्स-रे ऑब्‍जर्वेट्री के डेटा में उन साउंड वेव्‍स को रिविजिट करती है, जिन्‍हें खोजा ग...

मंगल ग्रह से ऐसे दिखते हैं पृथ्वी और चंद्रमा, NASA की इस अदभुत तस्वीर में देखें

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अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं, यह तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने मंगल ग्रह से पृथ्वी और चंद्रमा का नाज़ारा देखा है? अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अकसर खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीरों को शेयर करता है और कुछ ऐसा ही एजेंसी ने एक बार फिर किया है। NASA ने अपने मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर पर हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) कैमरे से ली गई पृथ्वी और चंद्रमा की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें आप यह अनुभव कर सकते हैं कि मंगल ग्रह से हमारी पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं।  NASA ने इस तस्वीर को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। पोस्ट में नासा ने लिखा (अनुवादित), "मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने पृथ्वी और चंद्रमा की इस झलक को कैद किया है। हमारे सात में से प्रत्येक रोबोट अब मंगल ग्रह पर काम कर रहे हैं, वास्तव में एक #NASAEarthling है, जो हमारी आंखों के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि वे लाल ग्रह का पता लगाते हैं - हमारे नीले ग्रह के लिए हमारी समझ और प्रशंसा को गहरा करते हैं।"   Mars Reconnaissance Orbiter caught this glimpse of Earth a...

इस बार सामान्य रहेगा मानसून : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD)

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First Published: April 15, 2022 | Last Updated:April 15, 2022 भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने जून से सितंबर की अवधि के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम की वर्षा के लिए एक लंबी दूरी का पूर्वानुमान जारी किया है। इस पूर्वानुमान में कहा गया है कि इस वर्ष वर्षा सामान्य रहेगी। मुख्य बिंदु  IMD का लंबी दूरी का पूर्वानुमान दो चरणों में जारी किया जाता है। पहला पूर्वानुमान अप्रैल के महीने में जारी किया गया है। दूसरा पूर्वानुमान मई के अंत में जारी किया जाता है। देश में 1971 से 2020 की अवधि के लिए, लंबी अवधि की औसत मौसमी वर्षा 87 सेमी है। भारतीय प्रायद्वीप के उत्तरी भागों और उससे सटे मध्य भारत के साथ-साथ हिमालय की तलहटी और उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य रहेगी। पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों, दक्षिण प्रायद्वीप के दक्षिणी हिस्सों और उत्तर पश्चिमी भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होगी। पूर्वानुमान का सारांश जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक, देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की मौसमी बारिश साम...

अहम खोज : वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर मिले बर्फ के ज्वालामुखी

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रहस्‍यों से भरा ब्रह्मांड वैज्ञानिकों को हर रोज कुछ ना कुछ जानने के लिए प्रेरित करता है। अब प्‍लूटो ग्रह को लेकर नासा ने नई जानकारी है। नासा के न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान से मिला डेटा बताता है कि यह ठंडा ग्रह पहले से ज्‍यादा गतिशील है। यहां गुंबद के आकार वाले बर्फ के ज्वालामुखी हैं, जो अभी भी एक्टिव हो सकते हैं। मंगलवार को वैज्ञानिकों ने कहा कि 10 से ज्‍यादा क्रायोवोल्कैनो एक किलोमीटर से लेकर 7 किलोमीटर के एरिया में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जैसे पृथ्वी के ज्वालामुखियों से गैसें और पिघली हुई चट्टानों का लावा निकलता है, उसी तरह से ये क्रायोवोल्कैनो बड़ी मात्रा में बर्फ निकालते हैं। इसमें जमे हुए पानी के साथ-साथ कुछ और भी हो सकता है। नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक और कोलोराडो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्‍लेनेटरी साइंटिस्‍ट केल्सी सिंगर ने कहा, इन फीचर्स को खोजने से यह संकेत मिलता है कि प्लूटो अधिक सक्रिय या भूगर्भीय रूप से जीवित है। यहां बर्फ होने की संभावना आश्चर्यजनक है। गौरतलब है कि प्‍लूटो ग्रह का आकार पृथ्वी के चंद्रमा से भी छोटा है। इसका व्यास लगभग 1...

सूर्य से निकल रहीं रहस्‍यमयी तरंगें, क्‍या चल रहा है इस विशाल तारे के अंदर?

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सूर्य में होने वाली हलचलों पर नजर रखने वाले रिसर्चर्स ने रहस्‍यमयी वेव्‍स (तरंगों) के ग्रुप का पता लगाया है। ये तरंगें सूर्य से निकलती हैं और पहले लगाए गए अनुमान से भी तीन गुना तेज यात्रा करती हैं। रिसर्चर्स को लगता है कि ये तरंगें उन्हें सूर्य के अंदरूनी हिस्सों को समझने में मदद कर सकती हैं। करीब 25 साल के डेटा को स्‍टडी करने के बाद इन तरंगों की खोज हुई है। ये हाई-फ्रीक्‍वेंसी रेट्रोगेट (HFR) तरंगें है, जो सौर सतह पर भंवरों के रूप में दिखाई देती हैं और सूर्य के रोटेशन की उल्‍टी दिशा में चलती हैं। इस रिसर्च को न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) ने मिलकर किया है। रिसर्च का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह है कि ये तरंगें मौजूदा थ्‍योरी से भी तीन गुना ज्‍यादा तेज रफ्तार से आगे बढ़ती हैं। सूर्य के आंतरिक क्षेत्रों में क्‍या हो रहा है, इसके लिए भी इन तरंगों की स्‍टडी जरूरी है। तारों को अबतक जितना समझा गया है, उसमें HFR तरंगें नई पहले साबित हो सकती हैं। फ‍िलहाल तो रिसर्चर्स यह समझना चाह रहे हैं कि आखिर क्‍यों ये तरंगें इतनी तेज गत‍ि से चलती हैं।  ने...

फुटबॉल स्टेडियम जितना बड़ा एस्ट्रॉयड (Asteroid) इस हफ्ते पहुंचेगा पृथ्‍वी के करीब

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने कहा है कि एक विशालकाय एस्‍टरॉयड (asteroid) इस हफ्ते पृथ्‍वी के करीब पहुंचेगा। 2013 BO76 नाम का यह एस्‍टरॉयड लगभग 200 से 450 मीटर चौड़ा होगा और 50,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से यात्रा करेगा। एजेंसी ने इस एस्‍टरॉयड को ‘संभावित रूप से खतरनाक' की कैटिगरी में रखा है, हालांकि इसके पृथ्वी से सुरक्षित दूरी पर उड़ने की उम्मीद है। नासा के अनुसार, एक फुटबॉल स्टेडियम के आकार का यह एस्‍टरॉयड भारतीय के समय के अनुसार शुक्रवार को पृथ्वी के सबसे करीब पहुंच जाएगा। नासा ने बताया है कि जब यह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी के सबसे करीब होगा, तब भी इसके और पृथ्‍वी के बीच की दूरी 51 लाख किलोमीटर से ज्‍यादा होगी। यह चंद्रमा और पृथ्वी के बीच की दूरी से 13 गुना ज्‍यादा है। फ‍िर क्‍यों इसे संभावित रूप से खतरनाक की कैटिगरी में रखा गया है? दरअसल ऐसा एस्‍टरॉयड के साइज और पृथ्‍वी से उसकी दूरी को देखते हुए किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं होता कि वह एस्‍टरॉयड पृथ्‍वी के लिए किसी तरह का खतरा बन सकता है।  Object name ☄️: (2013 BO76) Is potentially hazardous ???? Close approach da...

Nasa के जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप के मिरर्स का कमाल, तारे की इस इमेज से चौंकाया

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पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में लॉन्‍च किया गया नासा का जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप (James Webb Space Telescope) अब धीरे-धीरे अपनी अहमियत साबित करने लगा है। दुनिया के इस सबसे बड़े टेलीस्‍कोप ने एक सिंगल तारे की संगठित (unified) इमेज शेयर की है। ज्‍यादातर ट्रेडिशनल टेलीस्‍कोप में एक प्राइमरी मिरर होता है, जो लाखों मील दूर स्थित तारों की रोशनी को इकट्ठा करता है। लेकिन जेम्‍स वेब में 18 हेक्सागोनल (hexagonal) मिरर सेगमेंट हैं। ये सभी एक बड़े मिरर के रूप में जुड़े और इमेज को तैयार किया। यह एक लंबी प्रक्रिया थी, जिसमें बहुत सटीकता की जरूरत थी। नासा ने बताया है कि जेम्‍स वेब की टीम ने ‘फाइन फेजिंग' नाम की प्रक्रिया के तहत मिरर्स को सफलतापूर्वक एक सीध में किया।  11 मार्च को प्रक्रिया पूरी होने के बाद नासा ने टेलीस्कोप से ली गई इमेज को रिलीज किया है। इसने इमेज के सेंटर में शानदार स्पार्कलिंग डॉट को दिखाया है। नासा ने कहा है यह ऑब्‍जर्वेट्री दूर की चीजों से प्रकाश को सफलतापूर्वक इकट्ठा करने और इसे अपने उपकरणों तक पहुंचाने में सक्षम है। एक बयान में नासा ने कहा है कि जेम्‍स वेब के सभी ऑप्टिक...

SpaceX के CEO एलन मस्‍क को भरोसा, इस साल ऑर्बिट में पहुंच जाएगा स्‍टारशिप

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अरबपति एलन मस्‍क (Elon Musk) ने गुरुवार को कहा कि वह इस इस बात को लेकर ‘बहुत ज्‍यादा आश्‍वस्‍त' हैं कि उनकी नई स्पेसएक्स (SpaceX) स्टारशिप इस साल पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंच जाएगी। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका के टेक्‍सास स्थित बोका चीका (Boca Chica) में कंपनी की स्‍टारबेस फैसिल‍िटी में उन्‍होंने न्‍यूज मीडिया और अपने सपोटर्स को संबोधित किया। इस दौरान उन्‍होंने सवालों के जवाब भी दिए। एलन मस्क ने स्वीकार किया कि स्पेसएक्स ने अपने सुपर हेवी रॉकेट के लिए ‘रैप्टर 2' इंजन डेवलप करने में कठिनाइयों का सामना किया है। यह एक नेक्‍स्‍ट-जेनरेशन री-यूजेबल लॉन्‍च बूस्‍टर है, जिसे स्‍टारशिप स्‍पेसक्राफ्ट को ऑर्बिट में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्‍होंने बताया कि तेज गर्मी के कारण इंजनों के थ्रस्‍टर चैंबर्स के अंदर समस्‍या आ रही है।  हालांकि उन्‍होंने बताया कि ‘हम इसे सॉल्‍व करने के बहुत करीब हैं।' अगले महीने तक एक सप्ताह में लगभग सात-आठ इंजनों का प्रोडक्‍शन बढ़ाने और साल के आखिर तक हर महीने एक नई स्टारशिप और बूस्टर का प्रोडक्‍शन करने की उम्मीद है। एलन मस्‍क ने यह भी वि...

क्‍या मंगल ग्रह पर मौजूद है एलियन? जानें इस तस्‍वीर का सच

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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की बात आती है, तो सबसे पहले जेहन में आते हैं एलियंस  (alien)। ऐसे दावों की भरमार है, जो कहते हैं कि एलियंस की भी अपनी एक दुनिया है। पृथ्‍वी पर भी एलियंस के आने के दावे हमने कई रिपोर्ट्स में पढ़े हैं। ताजा दावा मंगल (Mars) ग्रह को लेकर किया गया है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों के अनुसार, नासा के मार्स रोवर पर्सवेरेंस (Perseverance) ने मंगल ग्रह पर एक एलियन को देखा है। यह अफवाहें तब शुरू हुईं जब एक ब्लॉग राइटर ने सुझाया कि उसने मंगल ग्रह पर एक लटके हुए व्यक्ति को देखा। दावा किया कि नासा के रोवर ने पिछले साल जो इमेज भेजी थीं, उनमें से एक में चट्टानों के बीच सतह पर एलियन लेटा हुआ था। इस पर कई लोगों ने कहा कि यह मंगल ग्रह पर जीवन के संकेत को साबित करता है। हालांकि सच्‍चाई यह है कि वह कोई ‘एलियन' नहीं है।   UFO Sightings Daily blog में लिखते हुए स्कॉट सी वारिंग ने कहा कि उन्हें नासा की तस्वीरें खंगालना पसंद है। दावा किया कि उन्‍हें कुछ अनोखा मिला, जो जीवन का 100 फीसदी प्रूफ है। नासा के मार्स रोवर को देखने के लिए एक व्यक्ति लेटा हुआ है।  अपने ब्‍लॉग में वारिंग ने...

SpaceX की बड़ी तैयारी, इस साल लॉन्‍च करेगी 52 मिशन

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एलन मस्क (Elon Musk) की कमर्शल स्पेस कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) ने इस साल 52 मिशन लॉन्च करने की योजना बनाई है। अगर SpaceX इसमें कामयाब होती है, तो वह एक साल में अबतक के सबसे अधिक लॉन्च पूरे करेगी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के लिए भी SpaceX पार्टनर की भूमिका में है, खासतौर पर नासा के ह्यूमन स्‍पेसफ्लाइट प्रोग्राम के लिए। इसके पास इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) से अंतरिक्ष यात्रियों और कार्गो को लाने और ले जाने की जिम्‍मेदारी है। नासा के आर्टेमिस (Artemis) प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने के लिए भी SpaceX नेक्‍स्‍ट जेनरेशन रॉकेट सिस्टम डेवलप कर रही है। इस रॉकेट का नाम स्टारशिप रखा गया है। SpaceX मुख्य रूप से नासा के प्रोग्राम्‍स की मदद करती है साथ ही यह कंपनी समय-समय पर दूसरी कंपनियों, इंटरनेशनल कस्‍टमर्स और अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए भी सैटेलाइट लॉन्च करती है। हालांकि इस साल जो 52 लॉन्च करने की योजना है, उनमें से ज्‍यादातर लॉन्‍च SpaceX के लिए किए जाएंगे। माना जा रहा है कि ये लॉन्‍च Starlink के सैटेलाइट के लिए होंगे। Starlink भी स्‍पेसएक्‍स का ही भाग...

पृथ्‍वी के पास से गुजर गया 3.78 लाख करोड़ रुपये का Asteroid, हम इसे पा सकते हैं अगर…

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अंतरिक्ष खनन Space mining एक ऐसा विचार है, जिस पर 10 साल पहले बहुत जोश के साथ चर्चा हुई। कई लोगों ने तर्क दिया कि कीमती और दुर्लभ धातुओं के लिए प्राइवेट अंतरिक्ष यात्रियों को नियुक्त करके पृथ्‍वी के पास से गुजरने वाले एस्टरॉयड Asteroid का पता लगाकर उनका खनन किया जा सकता है। इससे कमर्शल स्‍पेस इकॉनमी में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है। हालांकि इस पर बहुत ज्‍यादा प्रगति नहीं हुई। यह आइडिया एक बार फ‍िर चर्चा में आया है, क्‍योंकि NEA नाम का एस्टरॉयड जिसे 4660 Nereus कहा जाता है, वह पृथ्वी के पास से होकर गुजर गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि 330 मीटर व्यास वाले और अंडे के आकार के एस्टरॉयड में करीब 5 अरब डॉलर (करीब 3.78 लाख करोड़ रुपये) की कीमती धातुएं हैं। नेरियस Nereus कभी भी खतरनाक होकर पृथ्वी के करीब नहीं आया। जब यह पृथ्‍वी के सबसे पास था, तब भी यह  3.9 मिलियन किलोमीटर दूर था। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग 10 गुना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एस्टरॉयड अब 39 साल बाद फिर से पृथ्वी के पास से गुजरेगा। उस समय "स्‍पेस माइनर्स" लॉन्च करना संभव हो सकता है। 6 लाख...

क्‍या शुक्र ग्रह पर संभव होगा जीवन? वैज्ञानिकों की इस रिसर्च से बढ़ी उम्‍मीद

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पृथ्‍वी के अलावा बाकी ग्रहों पर जीवन की संभावना ने लंबे समय से वैज्ञानिकों का ध्‍यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि ज्‍यादातर कोशिशों के बाद भी वैज्ञानिक कह कहने में असमर्थ हैं कि पृथ्‍वी के बाहर भी जीवन है। रहस्‍यों को सामने लाने के लिए वैज्ञानिकों ने चंद्रमा से लेकर मंगल ग्रह तक कई मिशन शुरू किए हैं। हमारे सौर मंडल के सबसे मुश्किल ग्रहों में से एक शुक्र ने भी वैज्ञानिकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। शुक्र का वातावरण कार्बन डाइऑक्साइड से भरा हुआ है। इसकी सतह इतनी गर्म है कि सीसा lead भी पिघल जाएगा। यह साबित करता है कि इस ग्रह पर जिंदगी का बच पाना नामुमकिन है।  हालांकि वेल्स स्थि‍त कार्डिफ यूनिवर्सिटी Cardiff University के रिसर्चर्स ने पिछले साल शुक्र के वातावरण में फॉस्फीन phosphine के स्रोतों की खोज करके हलचल मचा दी थी। उन्होंने दावा किया था कि पृथ्वी पर कार्बनिक पदार्थों के टूटने से स्वाभाविक रूप से पैदा होने वाली इस गैस का शुक्र पर मिलना वहां जीवन का संकेत हो सकता है। लेकिन इस पर बाकी लोगों ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि शुक्र ग्रह के बादल सल्फ्यूरिक एसिड की बूंदों में उसे ढक रहे...