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चीन अंतरिक्ष में बनाएगा सौर उर्जा संयंत्र

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First Published: June 14, 2022 | Last Updated:June 14, 2022 हाल ही में, चीन ने 2028 में निरंतर बिजली प्राप्त करने के लिए अंतरिक्ष में एक सौर ऊर्जा संयंत्र शुरू करने की योजना का प्रस्ताव रखा। मुख्य बिंदु  चीन ने 2030 तक अंतरिक्ष में 1 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अपडेटेड प्लान के मुताबिक चीन 2028 में एक सैटेलाइट लॉन्च करेगा। अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना  यह उपग्रह 400 किमी की ऊंचाई से अंतरिक्ष से जमीन तक वायरलेस पावर ट्रांसमिशन तकनीक का परीक्षण करेगा। यह सौर ऊर्जा को माइक्रोवेव या लेजर में बदल देगा। लेज़रों का उपयोग करते हुए, ऊर्जा पुंजों को विभिन्न लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया जाएगा, जिसमें गतिमान उपग्रह और पृथ्वी पर निश्चित स्थान शामिल हैं। सौर ऊर्जा संयंत्र की क्षमता 10 किलोवाट होगी, जो कुछ घरों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। परीक्षण सुविधा अंतरिक्ष-आधारित सौर ऊर्जा स्टेशन की सैद्धांतिक व्यवहार्यता के लिए, चीन चोंगकिंग के बिशन जिले में 33-एकड़ परीक्षण सुविधा का निर...

अंतरिक्ष के ‘कब्रिस्‍तान’ में वैज्ञानिकों ने खोजा रेडियो उत्‍सर्जन पैदा करने वाला न्यूट्रॉन तारा

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हमारी आकाशगंगा में असामान्य रेडियो उत्‍सर्जन पैदा करने वाले एक यूनीक न्यूट्रॉन की खोज ने खगोलविदों को हैरान कर दिया है। डेटा के विश्लेषण से रिसर्चर्स को पता चला है कि PSR J0941-4046 एक असामान्य न्यूट्रॉन तारा है, जो अन्य पल्सर की तुलना में बेहद धीमी गति से घूमता है। यह इसलिए भी खास है, क्योंकि यह न्यूट्रॉन स्टार ‘कब्रिस्तान' में रहता है। यह अंतरिक्ष में उस जगह को कहा जाता है जहां खगोलविद किसी भी रेडियो उत्सर्जन का पता लगाने की उम्मीद नहीं करते हैं। इस न्यूट्रॉन स्टार ने एक अजीब दिखने वाली फ्लैश उत्सर्जित की जो लगभग 300 मिलीसेकंड तक चली। यह फ्लैश एक न्यूट्रॉन स्टार जैसा दिखता था। रिसर्चर्स का दावा है कि यह पहले देखी गईं चीजों से एकदम अलग था। रिसर्चर्स ने उस एरिया का सर्वे करने के बाद कई और फ्लैशों का पता लगाया, लेकिन यह न्‍यूट्रॉन एकदम अलग निकला। रिसर्चर्स को लगता है कि उनकी खोज स्‍टीलर ऑब्‍जेक्‍ट्स के एक नए वर्ग के लिए रास्ता खोल सकती है।  सिडनी यूनिवर्सिटी की लेक्‍चरर मनीषा कालेब और उनके सहयोगियों ने साउथ अफ्रीका में मीरकैट रेडियो टेलीस्कोप का इस्‍तेमाल करते हुए मिल्की वे के ‘...

अमेरिका की बड़ी तैयारी : 2027 तक अंतरिक्ष में न्‍यूक्लियर पावर सिस्‍टम को करेगा टेस्‍ट, यह है मकसद

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अमेरिका अपने स्‍पेस प्रोग्राम्‍स को अलग लेवल पर ले जाने के लिए काम कर रहा है। यह देश अब अंतरिक्ष में न्‍यूक्लियर पावर सिस्‍टम्‍स को इस्‍तेमाल करने की योजना बना रहा है। अमेरिका की डिफेंस इनोवेशन यूनिट जिसे DIU के नाम से भी जाना जाता है, वह साल 2027 तक न्‍यूक्लियर पावर्ड प्रोटोटाइप की अंतरिक्ष में टेस्टिंग करने पर काम कर रही है। इसके लिए दो कंपनियों को कॉन्‍ट्रैक्‍ट भी सौंप दिया गया है। DIU ने जिन दो कंपनियों को चुना है, उनमें शामिल हैं एवलांच एनर्जी (Avalanche Energy) और अल्ट्रा सेफ न्यूक्लियर (Ultra Safe Nuclear)।  रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से एवलांच एनर्जी स्‍पेसक्राफ्ट के लिए बिजली क्षमताओं के साथ नेक्‍स्‍ट जेन न्‍यूक्लियर प्रोपल्‍शन का प्रदर्शन करेगी। दोनों कंपनियां मिलकर ऐसे टेस्‍ट सॉल्‍यूशन विकसित करेंगी, जिससे आने वाले समय में छोटे स्‍पेसक्राफ्ट को पृथ्‍वी से चंद्रमा के बीच में ऑपरेट किया जा सके। देश के डिफेंस डिपार्टमेंट को अंतरिक्ष में अपने कार्यक्रम आगे बढ़ाने के लिए ये कंपनियां हाई-पावर पेलोड भी डेवलप करेंगी।  DIU में न्‍यूक्लियर प्रोपल्‍शन एंड पावर के प्रोग्राम मैनेजर ...

अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन खोलेगी पृथ्‍वी जैसे दो ग्रहों का राज!

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अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी नासा (Nasa) ने पिछले साल दिसंबर में अंतरिक्ष में अबतक के सबसे बड़े टेलीस्‍कोप जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (James Webb Space Telescope) को लॉन्‍च किया था। यह टेलीस्‍कोप वहां खुद को सेटअप करने की प्रक्रिया पूरी करने वाला है और जल्‍द अपना काम शुरू कर सकता है। खबरों की मानें, तो इस टेलीस्‍कोप ने एक नई चट्टानी दुनिया का पता लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि यह टेलीस्‍कोप 50 प्रकाश वर्ष दूर दो छोटे ग्रहों पर स्‍टडी करेगा।  space.com ने लिखा है कि मौजूदा टेलीस्‍कोप टेक्‍नॉलजी में गैसीय आवरण वाले ग्रहों के मुकाबले चट्टानी ग्रहों को देखना ज्‍यादा कठिन है। लेकिन जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप में लगे पावरफुल मिरर और डीप स्‍पेस लोकेशन की वजह से पृथ्‍वी से थोड़े बड़े दो ग्रहों को टटोलने का काम जल्‍द शुरू हो सकता है। खास बात यह है कि इन ग्रहों को ‘सुपर अर्थ' के रूप में जाना जाता है।    इन ग्रहों को भले ही सुपर अर्थ के तौर पर पहचाना  जाता है, लेकिन यहां जीवन मुमकिन नहीं है। इनमें से एक ग्रह तो बेहद गर्म लावा से ढका हुआ है, जिसका नाम 55 कैनरी ई है। वहीं दूसरे ग्रह का...

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर खोज निकाला पृथ्वी से 4 गुना बड़ा ग्रह, जहां 1 साल है बस 11 दिन का!

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हाल ही में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने एक एग्जोप्लेनेट (ऐसा ग्रह जो सौरमंडल के बाहर किसी तारे का चक्कर लगाता हो) या सुपरअर्थ (super-Earth) की खोज की है जो हमारे प्लेनेट यानि पृथ्वी से 4 गुणा बड़ा है। खगोलविदों ने इसे Ross 508 b नाम दिया है। यह भी पृथ्वी की तरह एक सूर्य जैसे तारे के गिर्द चक्कर लगाता है जिसका नाम Ross 508 बताया गया है। यह 36.5 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है इसलिए नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह Ross 508 के हैबिटेबल जोन (तारे के समीप बने रहने योग्य जगह) में है। इस स्टडी को नाम दिया गया है- "M4.5 डवार्फ रॉस 508 के अंतरूनी छोर के पास हैबिटेबल जोन में घूमती सुपर अर्थ।" स्टडी को पब्लिकेशंस ऑफ द एस्ट्रॉनोमिकल सोसाइटी ऑफ जापान नाम के जर्नल में प्रकाशित करने के लिए स्वीकार किया गया है। Ross 508 b प्लेनेट तारे के पास उस दूरी पर घूमता है जिससे कि ग्रह पर पानी के बनने योग्य तापमान बना रहे। इससे पता चलता है कि रॉस 508 बी अपने तारे के हैबिटेबल जोन में है।  हालांकि, केवल हैबिटेबल जोन में चक्कर लगाने का ये मतलब नहीं है कि ग्रह पर जीवन होगा। यूं तो, म...

कल्पना से परे अंतरिक्ष के सबसे बड़े रहस्यों का जवाब हो सकता है 'Mirror World'

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भले ही मिरर वर्ल्ड फैंटेसी और कल्पना में आम धारणा है, लेकिन यह आज अंतरिक्ष के सबसे बड़े रहस्यों में से एक का जवाब भी हो सकता है। एक नए रिसर्च में वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने सुझाव दिया है कि पार्टिकल्स के "मिरर वर्ल्ड" जो हमसे अनदेखा रहता है, हबल कॉन्स्टेंट (Hubble Constant) समस्या का उत्तर हो सकता है। हबल कॉन्स्टेंट समस्या यूनिवर्स में एक्सपेंशन के रेट की सैद्धांतिक वैल्यू में विसंगति और माप द्वारा देखे गए विस्तार के वास्तविक रेट को कहते है। न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय के प्रमुख शोधकर्ता फ्रांसिस-यान साइर-रेसीन और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के फी जीई और लॉयड नॉक्स ने कहा (अनुवादित) "मूल रूप से, हम बताते हैं कि ब्रह्मांड विज्ञान में हम जो बहुत सारे अवलोकन करते हैं उनमें ब्रह्मांड को समग्र रूप से आकार देने के तहत एक अंतर्निहित समरूपता होती है। यह समझने का एक तरीका दे सकता है कि ब्रह्मांड के एक्सपेंशन रेट के विभिन्न मापों के बीच एक विसंगति क्यों प्रतीत होती है।" उनके कमेंट्स को सिमेट्री ऑफ कॉस्मोलॉजिकल ऑब्जर्वेबल्स, ए मिरर वर्ल्ड डार्क सेक्टर और हबल कॉन्स्टेंट नाम ...

अंतरिक्ष में Boeing की पहली उड़ान, गड़बड़ी के बावजूद स्‍टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट लॉन्‍च

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तीन साल की देरी के बाद आखिरकार बोइंग (Boeing) का स्‍टारलाइनर (Starliner) स्‍पेसक्राफ्ट लॉन्‍च हो गया है। यूनाइटेड लॉन्च अलायंस (ULA) के एटलस V रॉकेट पर इस स्‍पेसक्राफ्ट को भारतीय समय के मुताबिक तड़के करीब साढ़े 4 बजे फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से लॉन्च किया गया। यह इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के रास्‍ते पर है। सब कुछ योजना के मुताबिक होता है तो Starliner शुक्रवार शाम को ISS के साथ डॉक करेगा। यह करीब चार से पांच दिन वहां रहेगा। इस मिशन के जरिए बोइंग यह बताना चाहती है कि उसका स्‍पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने के लिए तैयार है।  अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। इनमें बोइंग भी शामिल है, जो एक मानव रहित अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल की टेस्टिंग करके स्‍पेस सेक्‍टर में अपनी प्रतिष्‍ठा को बेहतर बनाना चाहती है। यह लॉन्‍च काफी वक्‍त से पेंडिंग था, जिसका फायदा एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर स्‍पेसएक्‍स को हुआ है।  रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग और नासा के लिए यह लॉन्‍च बड़ी कामयाबी है। एटलस वी रॉकेट से अलग होने के बाद स्टारलाइनर ने खुद को ऑ...

3 साल की देरी के बाद Boeing की अंतरिक्ष की दौड़ कल सुबह, लॉन्‍च होगा स्टारलाइनर, ऐसे देखें लाइव इवेंट

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अमेरिकी एयरोस्‍पेस की दौड़ में कई प्राइवेट कंपनियां मुकाबला कर रही हैं। इनमें बोइंग (Boeing) भी शामिल है, जो एक मानव रहित अंतरिक्ष यात्री कैप्सूल की टेस्टिंग करने और स्‍पेस सेक्‍टर में अपनी प्रतिष्‍ठा को बेहतर बनाने में लगी है। बीते दिनों हमने आपको बताया था कि 19 मई को CST-100 स्टारलाइनर स्‍पेसक्राफ्ट को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन के लिए लॉन्‍च किया जाना है। नासा के अंतरिक्ष यात्रियों और अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि बोइंग का स्टारलाइनर स्‍पेस कैप्सूल, इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए अपने मानव रहित लॉन्‍च के लिए तैयार है। यह लॉन्‍च काफी वक्‍त से पेंडिंग है, जिसका फायदा एलन मस्‍क के स्‍पेस वेंचर स्‍पेसएक्‍स को हुआ है। लॉन्‍च का वक्‍त भारतीय समय के मुताबिक, 20 मई सुबह 4:24 बजे है।  गमड्रॉप के आकार वाले बोइंग सीएसटी-100 स्टारलाइनर कैप्सूल को साल 2019 में लॉन्‍च किया जाना था, लेकिन इसका सॉफ्टवेयर फेल होने से ऐसा नहीं हो सका। पिछले साल बोइंग और उसकी सहयोगी एयरोजेट के बीच स्‍टारलाइनर के प्रोपल्‍शन सिस्‍टम को लेकर टकराव हुआ था। इस वजह से जुलाई 2021 की टेस्‍ट फ्लाइट को भी कैंसल करना ...

अंतरिक्ष से दिखा चंद्र ग्रहण का शानदार नजारा, लाजवाब हैं ये तस्‍वीरें

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इस साल का पहला चंद्र ग्रहण खत्‍म हो गया है। भारत में यह दिखाई नहीं दिया, लेकिन कई देशों के लोग इस खगोलीय घटना के गवाह बने। लंदन, पेरिस, रोम, ब्रुसेल्स, जोहान्सबर्ग, मैड्रिड, सैंटियागो, वॉशिंगटन, न्यू यॉर्क, रियो डी जनेरियो और शिकागो में लोगों ने पूर्ण चंद्र ग्रहण को देखा। इस बीच, दिल को छू लेने वाली तस्‍वीरें आई हैं अंतरिक्ष से। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर मौजूद अंत‍रिक्ष यात्रियों ने 15 मई की रात पूर्ण चंद्र ग्रहण की हैरान करने वाली तस्‍वीरें खींचीं।  यूरोपीय अंतरिक्ष यात्री सामंथा क्रिस्टोफोरेटी ने ट्विटर पर कई स्नैपशॉट शेयर किए हैं। इनमें स्‍पेस स्टेशन के इक्विपमेंट से तैयार किए गए ‘सुपर फ्लावर ब्लड मून' चंद्र ग्रहण के विभिन्न चरणों को दिखाया गया है। तस्‍वीरों में नीचे बादलों से ढकी पृथ्वी दिख रही है। अपने ट्वीट में क्रिस्टोफोरेटी लिखती हैं, ‘क्या आप भाग्यशाली कल रात के चंद्र ग्रहण को देखने के लिए? हम थे!'  क्रिस्टोफोरेटी ने जो इमेजेस शेयर की हैं, उनमें से कुछ में अंतरिक्ष स्टेशन के सौर पैनलों के पास चंद्रमा एकदम अंधेरे में नजर आता है। बताया जाता है कि अगला पूर्ण च...

वैज्ञानिकों का दावा अंतरिक्ष में मौजूद हैं न दिखने वाली अदृश्य (इनविजिबल) दीवारें!

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अंतरिक्ष की दुनिया रहस्यों से भरी हुई है और वैज्ञानिकों को आए दिन अंतरिक्ष के बारे में कुछ नया पता चलता है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसकी परतों से पर्दा उठाने की कोशिश की जा रही है। अब वैज्ञानिकों ने कहा है कि अंतरिक्ष में दीवारें भी मौजूद हो सकती हैं। हालांकि, ये वैसी दीवारें नहीं है जैसे किसी कमरे की होती हैं। बल्कि, ये स्पेस में एक रुकावट के रूप में मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन्हें बनाने में एक चौथे बल का हाथ हो सकता है जो कि एक नए कण का परिणाम हो सकता है जिसे सिम्मीट्रॉन (symmetron) कहा जाता है। इस फोर्स का अंतरिक्ष में होना वैज्ञानिकों को उन घटनाओं का खुलासा करने में मदद करेगा जिनके बारे में अब तक वे परेशान थे।  फिलहाल, हम अपने अंतरिक्ष को समझने के लिए लैम्ब्डा कोल्ड मैटर मॉडल को इस्तेमाल करते हैं। ये मॉडल कहता है कि छोटी गैलेक्सी बड़ी गैलेक्सियों के अस्त-व्यस्त ऑर्बिट में घूमती हैं। लेकिन नई स्टडी की मानें तो वास्तव में, कई छोटी गैलेक्सी, जो बड़ी गैलेक्सियों के ऑर्बिट में घूमती हैं, वे पतले फ्लैट डिस्क जैसे आकार में रखी गई हैं जो कि शनि ग्रह की रिंग्स के जैसा है...

पता चल गया! डायनासोर का खात्मा किसने किया, वैज्ञानिकों को यहां मिले अंतरिक्ष से आए एस्ट्रॉयड के टुकड़े

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डायनासोर का नाम सुनते ही ज़हन में विशालकाय जीवों की छवि उभर आती है जिन्होंने कभी इस धरती पर राज किया होगा। वैज्ञानिक मानते हैं कि डायनासोर 6.60 करोड़ साल पहले दुनिया में मौजूद थे और एक अत्य़ंत विशाल एस्ट्रॉयड के धरती से टकराने पर उनका नीले ग्रह से खात्मा हो गया। जहां पर ये एस्ट्रॉयड टकराया बताया जाता है उसे मैक्सिको के युक्टान आइलैंड के रूप में जाना जाता है। एस्ट्रॉयड के टकराने के बाद धरती पर शीत युग की शुरुआत हुई और उसके बाद फिर इन्सानों का आना हुआ।  NASA ने डायनासोरों की मौजूदगी के जुडी एक बहुत बड़ी खोज का दावा किया है। एजेंसी ने दावा किया है कि टकराने वाले एस्ट्रॉयड के बहुत ही छोटे टुकड़े खोजे गए हैं जो गोंद में जमे पाए गए हैं। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों को उत्तरी डकोटा के हेल क्रीक फॉर्मेशन की एक जीवाश्म साइट पर कुछ ऐसी चीजें मिली हैं जो बहुत हैरान करने वाली हैं। यह वही जगह है जहां पर डायनासोर का दुनिया से नाम-ओ-निशान मिटने के समय के सबूतों को अवशेषों के रूप में संजोकर रखा गया है। इनमें मलबे में फंसी एक मछली मिली है। इसके बारे में कहा गया है कि इस मछली ने उस मलबे को ...

चीन ने तेज किया अपने अंतरिक्ष स्‍टेशन का निर्माण, अगले मिशन के लिए पहुंचाए स्पेयर पार्ट्स

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चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। उसका मून मिशन तो जारी है ही, मंगल मिशन की भी तैयारियां चल रही हैं। इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन की तर्ज पर वह अपना अंतरिक्ष स्‍टेशन तैयार कर रहा है, जिसके लिए एक कार्गो जहाज को मंगलवार को निर्माणाधीन स्‍पेस स्टेशन के साथ डॉक किया गया। तियानझोउ-4 अंतरिक्ष यान को हैनान के दक्षिणी द्वीप प्रांत में वेनचांग लॉन्च बेस से लॉन्ग मार्च-7 Y5 रॉकेट के ऊपर अंतरिक्ष में उतारा गया। देश की स्‍टेट मीडिया ने बताया कि इसे लगभग सात घंटे बाद स्टेशन के साथ डॉक किया गया। यह कार्गो जहाज अगले चालक दल के लिए रिसर्च इक्विपमेंट और स्टेशन को मेंटेन करने के लिए स्पेयर पार्ट्स को सप्‍लाई कर रहा है। एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चालक दल 6 महीने अंतरिक्ष में बिताएगा। पिछले महीने ही एक अन्‍य चालक दल 6 महीने बिताकर अंतरिक्ष से लौटा था। अब अगले मिशन के तहत अंतरिक्ष में जाने वाला 3 सदस्‍यीय चालक दल वहां शेनझोउ 14 कैप्सूल में दो मॉड्यूल जोड़ने के लिए जाएगा। तियांगोंग जिसे हेवनली पैलेस भी कहते हैं, उसका मुख्‍य मॉड्यूल अप्रैल 2021 में लॉन्च किया गया था। इसका ...

स्‍पेस में रहने से बड़ा हो जाता है अंतरिक्ष यात्रियों का दिमाग, जानें क्‍यों होता है ऐसा

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अंतरिक्ष की यात्रा पर जाना जितना रोमाचंक लगता है, यह उतना ही मुश्किलों से भरा है। अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों को कई बदलावों से गुजरना पड़ता है, जिसका असर उनके मस्तिष्‍क पर दिखाई देता है। रिसर्चर्स ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में बदलाव का पता लगाया है। रिसर्चर्स ने 15 अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग पर शोध किया। उन्‍हें पता चला कि मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं के आसपास की जगह, जो द्रव यानी फ्लूइड से भरी होती है, उसमें बदलाव आ गया।  यह रिसर्च ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल' में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि रिसर्चर्स ने मैग्‍नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) का इस्‍तेमाल करके अंतरिक्ष में जाने वाले से पहले यात्रियों के दिमाग को देखा। जब अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन पर पहुंच गए, उसके बाद भी रिसर्चर्स ने एक-एक महीने के अंतराल पर उनके दिमाग को देखा। 6 महीने बाद जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्‍वी पर लौटे, तो उनकी बारीकी से जांच की गई।  रिसर्चर्स ने पाया कि अंतरिक्ष यात्रियों के दिमाग में द्रव से भरी वह जगह जिसे पेरिवास्कुलर स्पेस ...

कौन कहता है अंतरिक्ष में साउंड नहीं, ब्‍लैक होल से आने वाली इस आवाज को सुनिए

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ब्रह्मांड में होने वाली गतिविधियां हर बार हमें एक नई जानकारी देती हैं। क्‍या आपने कभी किसी ब्‍लैकहोल से निकलने वाले साउंड के बारे में पढ़ा है। ब्‍लैक होल, जिनके बारे में हम यह समझते आए हैं कि उनमें गुजरकर प्रकाश भी गायब हो जाता है, वह साउंड भी जनरेट कर सकते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने हाल ही में पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में एक ब्लैक होल से निकलने वाली साउंड क्लिप को रिलीज किया है। इसमें ब्‍लैक होल से निकलने वाले साउंड को सुना जा सकता है।  रिपोर्टों के अनुसार, साल 2003 से इस ब्‍लैक होल को पर्सियस आकाशगंगा क्‍लस्‍टर के केंद्र में देखा जा रहा है। खगोलविदों ने इसकी वजह का भी अनुमान लगया है। उनका कहना है कि ब्‍लैक होल जिन प्रेशर वेव्‍स को भेजता है, उनसे इस आकाशगंगा की गर्म गैसों में तरंगें पैदा होती हैं। यह साउंड में बदलने लगती हैं। हालांकि हम इसे सीधे कानों से नहीं सुन सकते। यह सब तकनीक के जरिए हमारे सामने आया है।   यह सब मुमकिन हुआ है सोनिफिकेशन के जरिए। यह नासा की चंद्रा एक्स-रे ऑब्‍जर्वेट्री के डेटा में उन साउंड वेव्‍स को रिविजिट करती है, जिन्‍हें खोजा ग...

अंतरिक्ष की सबसे बड़ी दूरबीन ने ली थी ब्‍लैक होल की यह तस्‍वीर, जानें इसके बारे में

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हबल स्पेस टेलीस्कोप ने कई बीते साल से ब्रह्मांड की हैरान करने वाली तस्‍वीरों को कैद किया है। इसने हमें एक ऐसी दुनिया की झलक दिखाई है, जिसकी कल्पना भी हममें से कई लोगों ने नहीं की होगी। पृथ्‍वी से सैकड़ों प्रकाश-वर्ष दूर होने वाली गतिविधियों को इसने हम तक पहुंचाया है, जिसमें से कई तो बेहद यादगार हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) कुछ समय के अंतराल में ऐसी तस्‍वीरों को शेयर करती रहती है, जो अतीत में ली गई हैं। इस बार भी हबल टेलीस्‍कोप की ‘फ्लैशबैक फ्राइडे' सीरीज के रूप में एक ऐसी ही तस्‍वीर को नासा ने शेयर किया है। नासा ने जो तस्‍वीर शेयर की है, उसमें हबल टेलीस्‍कोप ने आकाशगंगाओं के केंद्रों पर धूल से भरे ब्लैक होल की डिस्क को कैप्चर किया है। हबल की साइट के अनुसार, पहली इमेज में NGC 4261 नाम की एक अंडाकार आकाशगंगा है। तस्‍वीर में इसके केंद्र में स्थित ब्लैक होल को फ्यूल पहुंचाने वाली ठंडी गैस की धूल की विशालकाय डिस्क दिखाई देती है। यह आकाशगंगा लगभग 100 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।   खगोलविदों का अनुमान है कि इसकी डिस्क लगभग 300 प्रकाश वर्ष चौड़ी है। इसके चमकीले कोर का ...

एलियंस से संपर्क करने के लिए NASA अंतरिक्ष में भेजेगा नग्न इंसानों की तस्वीर

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NASA लंबे अर्से से एलियंस से संपर्क करने की कोशिश करता आया है और अब स्पेस एजेंसी इस ओर एक नया कदम उठाने का फैसला कर चुकी है। नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में इंसानों की नग्न तस्वीरें भेजने की योजना बना रहे हैं। एक लेटेस्ट मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि बाहरी दुनिया में अन्य जीवन के साथ संपर्क किया जा सकता है, जिसके लिए अब उन्होंने एक महिला और एक पुरुष की डिज़िटल पिक्सेलेटेड चित्र भेजने का फैसला किया है। इस चित्रण में इंसानी DNA और साथ ही ग्रैविटी (गुरुत्वाकर्षण) की जानकारी को भी शामिल किया गया है।  The Sun की रिपोर्ट कहती है कि NASA के वैज्ञानिकों ने इस तस्वीर को एक स्टडी में पेश किया था, जो ‘Beacon in the Galaxy' (BITG) नाम के एक प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। यह तस्वीर असल में वास्तविक इंसानों की नग्न तस्वीर नहीं है, बल्कि यह नग्न पुरुष और महिला का एक रेखा-चित्र है। इसमें महिला के साइड में एक DNA का चित्रण भी है और पुरुष के साइड में निचे गिरती चीज़ों के जरिए गुरुत्वाकर्षण को भी दर्शाया गया है। रिपोर्ट कहती है कि BITG प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बाहरी दुनिया में मौजूद किसी भी प्रक...

अंतरिक्ष यात्री बिना बोले कैसे करते हैं आपस में बात, Nasa ने वीडियो से समझाया

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अंतरिक्ष की दुनिया पृथ्‍वी से जितनी अनोखी और दिलचस्‍प नजर आती है, अंतरिक्ष का सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह उतनी ही चुनौतीपूर्ण होती है। स्‍पेस मिशन के दौरान यात्री आपस में कम्‍युनिकेट कर सकें, इसके लिए रेडियो सिस्‍टम और कम्‍युनिकेशन चैनलों का एक पूरा नेटवर्क काम करता है। लेकिन स्थितियां आपात भी तो हो सकती हैं। रेडियो सिस्‍टम के बंद होने या मिशन के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या फ‍िर स्‍पेस वॉक के दौरान एस्‍ट्रोनॉट आपस में कैसे बात करते हैं, यही नासा (Nasa) ने अपने नए वीडियो में समझाया है।    अंतरिक्ष यात्री बनना इतना आसान नहीं होता। इन यात्रियों को दिल और दिमाग से मजबूत होना पड़ता है। मिशन पर रवाना होने से पहले यात्रियों को साइलेंस सिग्‍नल्‍स की प्रैक्टिस करनी होती है। यह काफी हद तक भाव भंग‍िमाओं पर निर्भर करता है। वैसे, आम जिंदगी में भी तो लोग बिना कुछ कहे अपनी बात कह जाते हैं। जैसे-गुस्‍सा आने पर आंखों को तरार देना और माथे पर सिलवटें ले आना। कुछ इसी तरह से अंतरिक्ष यात्री भी नंबरों और भावनाओं के जरिए आपात स्थिति के दौरान आपस में बात करते हैं। हालांकि ये इशारे बहुत अनोखे नहीं ...

420 करोड़ रुपये का टिकट लेकर अंतरिक्ष की सैर पर गए तीन बिजनेसमैन लौटे पृथ्‍वी पर

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दुनिया के पहले प्राइवेट मिशन के तहत इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) पर गए तीन अमीर बिजनेसमैन और नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री करीब दो सप्‍ताह बाद सोमवार को पृथ्‍वी पर वापस लौट आए। उन्‍होंने अमेरिका के फ्लोरिडा तट पर लैंडिंग की। अमेरिकी कंपनी Axiom Space के इस मिशन में एलन मस्‍क की कंपनी स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने भी भूमिका निभाई थी। इस मिशन को पहले ही पृथ्‍वी पर लैंड करना था, लेकिन मौसमी बाधाओं के चलते देरी हुई। आखिरकार चार विशाल पैराशूट पर सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने धरती पर सफल लैंडिंग कर ली।  अंतरिक्ष यात्रियों के स्‍पेसशिप ने 17,500 मील प्रति घंटे (28,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की रफ्तार से वातावरण में दोबारा प्रवेश किया। इस वजह से स्‍पेसशिप पर आए निशानों के चलते इस ‘टोस्टेड मार्शमैलो' कहकर पुकारा गया। एक न्‍यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सिओम स्पेस के ऑपरेशंस डायरेक्‍टर, डेरेक हासमैन ने कहा कि हमने साबित किया कि हम चालक दल को इस तरह से तैयार कर सकते हैं, जो उन्हें ऑर्बिट में इफेक्टिव और प्रोडक्टिव बनाता है। हम ऐसा फिर से करने के लिए त...

Nasa ने टेस्‍ट की ‘होलोपोर्टेशन’ तकनीक, अंतरिक्ष यात्रियों के सामने आए डॉक्‍टर, जानें इसके बारे में

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने बताया है कि उसने ‘होलोपोर्टेशन' (holoportation) नाम की एक कम्‍युनिकेशन टेक्‍नॉलजी को टेस्‍ट किया है। यह एक ऐसा शब्‍द लगता है, जो मानो किसी साइंस फ‍िक्‍शन मूवी से आया हो और रोजाना जिंदगी में इसकी बहुत कम प्रासंगिकता हो। हालांकि यह शब्द ‘होलोग्राम' और ‘टेलीपोर्टेशन' का कॉम्‍बि‍नेशन है। पिछले साल अक्टूबर में नासा ने इस इनोवेट‍िव 3D तकनीक का इस्‍तेमाल अपने फ्लाइट सर्जन डॉ. जोसेफ श्मिड को इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन पर ‘होलोपोर्ट' करने के लिए किया था, जबकि डॉक्‍टर फ‍िजिकली पृथ्वी पर मौजूद थे। इस तकनीक के तहत डॉ श्मिड और उनकी टीम के मेंबर्स के 3D होलोग्राम बनाए गए और उन्हें स्‍पेस  स्टेशन पर ट्रांसमिट किया गया, जो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ लाइव बातचीत के रूप में दिखाई दिया। नासा के मुताबिक, होलोपोर्टेशन कम्‍युनिकेशन, लोगों के हाई-क्‍वॉलिटी वाले 3D मॉडल्‍स को रियल टाइम में कहीं भी ट्रांसमिट करने की इजाजत देता है। अगर इसे माइक्रोसॉफ्ट के होलोलेन्स जैसे मिक्‍स्‍ड रियलिटी डिस्प्ले के साथ जोड़ा जाता है, तो यह तकनीक यूजर्स को 3D में लोगों को ...

420 करोड़ रुपये का ‘टिकट’ लेकर अंतरिक्ष में गए 4 यात्रियों की वापसी में होगी देरी, यह है वजह

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अंतरिक्ष की दुनिया में पिछले दिनों इतिहास बना, जब पहली बार एक प्राइवेट मिशन के तहत चार यात्रियों ने इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी। अब खबर आ रही है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने खराब मौसम की वजह से ISS से इस प्राइवेट मिशन की अनडॉकिंग में देरी की है। इस वजह से एक्सिकॉम मिशन 1 (Ax-1) को इंटरनेशनल स्‍पेस स्‍टेशन में कुछ और घंटे बिताने होंगे। दरअसल, स्प्लैशडाउन लोकेशन पर मौसम ठीक नहीं होने की वजह से इस मिशन में देरी की जा रही है। NASA, SpaceX और Axiom Space ने मिलकर इस स्‍पेसक्राफ्ट के तय डिपार्चर को स्‍थगित कर दिया है।  नासा में स्पेस ऑपरेशंस मिशन डायरेक्टरेट की असोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर कैथी लाइडर्स ने ट्वीट किया है कि मौसम सही नहीं होने के कारण हम इंटरनेशनल स्‍पेस स्टेशन से आज रात होने वाली एक्सिकॉम मिशन 1 की अनडॉकिंग को रोक रहे हैं। NASA, Axiom Space और SpaceX की टीमें दुनिया के पहले प्राइवेट अंतरिक्ष यात्री मिशन की वापसी के लिए बेस्‍ट मौके की तलाश कर रही हैं।  We're waving off tonight's undocking of Axiom Mission 1 from @Space_Station due to unf...