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Mission Gaganyaan : इसरो ने सॉलिड रॉकेट बूस्टर HS-200 का परीक्षण किया

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First Published: May 19, 2022 | Last Updated:May 19, 2022 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में HS200 सॉलिड रॉकेट बूस्टर का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण कहाँ आयोजित किया गया? यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) में किया गया था। HS200 सॉलिड रॉकेट बूस्टर क्या है? यह S200 रॉकेट बूस्टर का मानव-रेटेड संस्करण है। दो HS200 बूस्टर जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल MkIII (GSLV Mk III) के पहले चरण का हिस्सा होंगे, जिसका उपयोग गगनयान मिशन के लिए किया जाएगा। HS200 बूस्टर लिफ्ट-ऑफ के लिए थ्रस्ट की आपूर्ति करेंगे। इस प्रकार, हालिया परीक्षण आगामी गगनयान मिशन के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है। इसरो के मुताबिक इस परीक्षण के दौरान करीब 700 पैरामीटर्स पर नजर रखी गई और यह पाया गया कि ये सभी नॉर्मल थे। यह बूस्टर 203 टन ठोस प्रणोदक से भरा हुआ था और 135 सेकंड के लिए इसका परीक्षण किया गया। HS200 सॉलिड रॉकेट बूस्टर का महत्व क्या है? यह ठोस प्रणोदक का उपयोग करने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परिचालन बूस्टर है। इस बूस्टर म...

2024 में इसरो (ISRO) शुक्र ग्रह के लिए मिशन लांच करेगा

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First Published: May 7, 2022 | Last Updated:May 7, 2022 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) दिसंबर 2024 में शुक्र के लिए एक अंतरिक्ष यान लॉन्च करने  की योजना बना रहा है। इसरो के शुक्र मिशन के उद्देश्य क्या हैं? शुक्र की सतह के नीचे क्या है इसका अध्ययन करना। शुक्र के वातावरण का अध्ययन करना। इसरो द्वारा शुक्र मिशन के तहत किन प्रयोगों की योजना बनाई गई है? सक्रिय ज्वालामुखीय हॉटस्पॉट और लावा प्रवाह सहित सतह प्रक्रियाओं और उथले उप-सतह स्ट्रैटिग्राफी की जांच। वायुमंडल की संरचना और गतिकी का अध्ययन करना। दिसंबर 2024 शुक्र के लिए अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने के लिए उपयुक्त क्यों है? यदि अंतरिक्ष यान को दिसंबर 2024 में लॉन्च किया जाता है, तो 2025 में अन्तरिक्ष यान की दिशा बदलने की योजना बनाई जा सकती है। 2025 में, पृथ्वी और शुक्र को इस तरह से संरेखित किया जाएगा कि अंतरिक्ष यान को शुक्र की कक्षा में प्रवेश करने के लिए न्यूनतम मात्रा में प्रणोदक (propellant) की आवश्यकता होगी। शुक्र की सतह का अध्ययन करने के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाएगा? इसके लिए हाई रेजो...

इसरो ने दिखाई चंद्रयान-3 मिशन की झलक, अगस्‍त में हो सकता है लॉन्‍च

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इंडियन स्‍पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (Isro) ने चंद्रमा पर जाने वाले देश के तीसरे अंतरिक्ष यान चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) की पहली झलक दिखाई है। इस साल अगस्‍त में इसका लॉन्‍च अनुमानित है और अभी असेंबलिंग का काम चल रहा है। एक डॉक्‍युमेंट्री के जरिए इसरो ने अपकमिंग मिशन को दिखाया है। 'स्पेस ऑन व्हील्स' नाम की डॉक्‍युमेंट्री को इसरो की वेबसाइट पर पोस्‍ट किया गया है। देश आजादी का अमृत महोत्‍सव मना रहा है, जिसके समारोह के एक हिस्‍से में इसरो ने अपनी उपलब्धियों को दर्शाया है। हाल में ही इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ यह कह चुके हैं कि ऑर्गनाइजेशन तीसरे चंद्र मिशन के प्रोपल्‍शन सिस्‍टम को टेस्‍ट कर रहा है।  चंद्रयान-3 को साल 2020 के आखिर में लॉन्च किया जाना था, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इस मिशन में देरी हुई। यह एक लैंडर-स्‍पेसिफ‍िक मिशन है, जिसमें कोई ऑर्बिटर नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्‍योंकि चंद्रयान -2 का पहला ऑर्बिटर सही तरीके से काम कर रहा है। चंद्रयान-3 मिशन इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चंद्रमा पर उतरने की इसरों की दूसरी कोशिश होगा और इंटरप्लेनेटरी मिशन की राह को बेहतर बनाएगा।  इस...

INSPIRESat-1 उपग्रह के लांच के लिए पहली बार इसरो के साथ शामिल हुए ताइवान के वैज्ञानिक

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First Published: February 15, 2022 | Last Updated:February 15, 2022 14 फरवरी, 2022 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने “INSPIRESat-1” नामक एक उपग्रह लॉन्च किया। INSPIRESat-1 का विकास किसने किया? INSPIRESat-1 को संयुक्त रूप से भारत, अमेरिका, ताइवान और सिंगापुर के विश्वविद्यालयों सहित अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम द्वारा विकसित किया गया है। इसके विकास में कौन से विश्वविद्यालय विकास में शामिल हैं? इन विश्वविद्यालयों में शामिल हैं: University of Colorado’s Laboratory for Atmospheric & Space Physics (LASP) Indian Institute of Space Science and Technology (IIST) ताइवान की National Central University (NCU) and सिंगापुर की Nanyang Technological University INSPIRESat-1 INSPIRESat-1 का मतलब ‘International Research & Teaching Satellite Project Satellite’ है। यह उपग्रह Indian Institute of Space Science & Technology (IIST) द्वारा Laboratory of Atmospheric & Space Physics at University of Colorado के सहयोग से विकसित किया गया है। इसे ...

इसरो ने सफलतापूर्वक लांच किया PSLV-C52 मिशन

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First Published: February 14, 2022 | Last Updated:February 14, 2022 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2022 के अपने पहले मिशन को 14 फरवरी, 2022 को लॉन्च किया। गौरतलब है कि यह मिशन 14 फरवरी को सुबह 5:59 पर लांच किया गया। मुख्य बिंदु  ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C52) 14 फरवरी को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया। इसमें एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-04) को ले जाया गया। PSLV-C52 PSLV-C52 का वजन 1710 किलोग्राम है। यह EOS-04 के चारों ओर 529 किमी की सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में परिक्रमा करेगा। यह मिशन दो छोटे उपग्रहों को सह-यात्रियों के रूप में ले जाएगा, अर्थात्, छात्र उपग्रह (INSPIREsat-1 ) – यह उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) द्वारा कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर में वायुमंडलीय और अंतरिक्ष भौतिकी की प्रयोगशाला के सहयोग से विकसित किया गया है। प्रौद्योगिकी प्रदर्शक उपग्रह (INS-2TD)  – इस उपग्रह को इसरो द्वारा विकसित किया गया है। यह भारत-भूटान संयुक्त उपग्रह (INS-2B) का...

इसरो लांच करेगा PSLV-C52 मिशन

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First Published: February 11, 2022 | Last Updated:February 11, 2022 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 2022 के अपने पहले मिशन को 14 फरवरी, 2022 को लॉन्च करने जा रहा है। मुख्य बिंदु  ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV-C52) 14 फरवरी को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से लॉन्च किया जायेगा। यह एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-04) को ले जायेगा। PSLV-C52 PSLV-C52 का वजन 1710 किलोग्राम है। यह EOS-04 के चारों ओर 529 किमी की सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में परिक्रमा करेगा। यह मिशन दो छोटे उपग्रहों को सह-यात्रियों के रूप में ले जाएगा, अर्थात्, छात्र उपग्रह (INSPIREsat-1 ) – यह उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIST) द्वारा कोलोराडो विश्वविद्यालय, बोल्डर में वायुमंडलीय और अंतरिक्ष भौतिकी की प्रयोगशाला के सहयोग से विकसित किया गया है। प्रौद्योगिकी प्रदर्शक उपग्रह (INS-2TD)  – इस उपग्रह को इसरो द्वारा विकसित किया गया है। यह भारत-भूटान संयुक्त उपग्रह (INS-2B) का अग्रदूत है। संचालन समय यह सैटेलाइट सिर्फ छह महीने तक ...

डॉ. एस. सोमनाथ होंगे इसरो के नए चेयरमैन

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First Published: January 14, 2022 | Last Updated:January 14, 2022 डॉ. एस. सोमनाथ इसरो के नए अध्यक्ष होंगे। वे के. सिवन का स्थान लेंगे। वह इसरो में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले चौथे केरलवासी हैं। पिछले केरलवासी के. राधाकृष्णन, माधवन नायर और के. कस्तूरीरंगन थे। के. सिवन और उनका विस्तार सोमनाथ को 2019 में नामांकित किया गया था। उन्हें उनकी वरिष्ठता के आधार पर नामांकित किया गया था। हालांकि सिवन का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया गया था। डॉ. सोमनाथ डॉ. सोमनाथ ने महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम में अपनी कॉलेज की प्री-डिग्री पूरी की। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई टी.के.एम. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से की। वह 1985 में VSSC केंद्र में शामिल हुए। उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में भारतीय विज्ञान संस्थान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। ISRO में काम वह PSLV परियोजना के शुरुआती चरणों में जुड़े थे। उनके नेतृत्व में LVM3-X/CARE की प्रायोगिक परीक्षण उड़ान पूरी हुई। 2010 में वे इसरो के एसोसिएट डायरेक्टर बने। वह GSLV Mk–III के परियोजना निदेशक थे। 2014 में, उन्होंने प्रणोदन और...

2022 के लिए इसरो के मिशन : मुख्य बिंदु

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First Published: January 4, 2022 | Last Updated:January 4, 2022 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष के. सिवन ने हाल ही में 2022 की योजनाओं के बारे में घोषणा की। उन्होंने 2021 में किए गए मिशनों के बारे में भी जानकारी प्रदान की। मिशन 2022 के लिए योजना PSLV पर पृथ्वी अवलोकन उपग्रह 4 और 6 लॉन्च किए जाने हैं। इसरो 2022 में आदित्य L1, चंद्रयान 3, XpoSat, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन और IRNSS भी लॉन्च करेगा। अन्य 2022 योजनाओं में DISHA, वीनस मिशन, ISROCNES, TRISHNA शामिल हैं। 2021 में पूरे किए गए मिशन निसार मिशन: एस-बैंड  SAR पेलोड नासा को दिया गया आदित्य L1 मिशन: हार्डवेयर लूप टेस्ट पूरा हुआ क्रायोजेनिक चरण के दौरान हुई समस्याओं के कारण GSLV F-10 मिशन विफल रहा चंद्रयान 3 के डिजाइन में बदलाव किया गया बदलाव गगनयान: क्रायोजेनिक चरण, L-IIO विकास इंजन, सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम और क्रू एस्केप सिस्टम मोटर्स के लिए परीक्षण जारी हैं। अंतरिक्ष यात्रियों ने अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। पैराशूट ड्रॉप टेस्ट शुरू हो गया है।  तृष्णा (TRISHNA...