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वैज्ञानिकों का दावा- चंद्रमा की मिट्टी से पैदा हो सकती है ऑक्‍सीजन

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दुनिया भर के वैज्ञानिक चंद्रमा पर इंसान की स्‍थायी मौजूदगी बनाए रखने के तरीके खोज रहे हैं। इसके लिए चंद्रमा को एक्‍सप्‍लोर किया जा रहा है। इस बीच, चीन के रिसर्चर्स ने दावा किया है कि चंद्रमा की मिट्टी में ऑक्सीजन और ईंधन पैदा करने की क्षमता है। उनका कहना है कि चंद्रमा पर मिट्टी में एक्टिव कंपाउंड्स होते हैं। ये कार्बन डाइऑक्साइड को ऑक्सीजन और ईंधन में बदल सकते हैं। इन निष्कर्षों से पता चलता है कि चंद्रमा का सतह पर मौजूद मिट्टी का इस्‍तेमाल हाइड्रोजन और मीथेन को हासिल करने के लिए किया जा सकता है। इनकी मदद से इंसान की अहम जरूरतें पूरी हो सकती हैं और वह चंद्रमा पर रह सकता है। रिसर्चर्स का कहना है कि वो चंद्रमा में सांस लेने लायक वातावरण भी पैदा कर सकते हैं।  आने वाले वर्षों में चंद्रमा पर कई देशों के मिशनों के लैंड होने की उम्‍मीद है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) भी अपने आर्टेमिस मिशन के तहत दोबारा से अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का मकसद चंद्रमा को मंगल समेत अंतरिक्ष में इंसान को आगे भेजने के लिए एक गेटवे के रूप में उपयोग करना...

बृहस्‍पति का चंद्रमा अपने महासागर के लिए खींच रहा ऑक्‍सीजन! क्‍या संभव होगा जीवन?

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बृहस्पति का चंद्रमा यूरोपा (Europa) उन खगोलीय पिंडों में से एक है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है। इस जांच का मकसद यह जानना है कि इस खगोलीय पिंड पर जीवन संभव हो सकता है या नहीं। यूरोपा, पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा छोटा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसकी जमी हुई सतह के नीचे एक महासागर छिपा है। अब तक मिले सबूत बताते हैं कि यह खगोलीय पिंड गर्म, नमकीन और जीवन को सक्षम बनाने वाले तत्‍वों से समृद्ध हो सकता है। यह पहले ही पता चल चुका है कि यूरोपा, ऑ‍क्‍सीजन पैदा करता है, हालांकि समस्‍या यह है कि इसकी सतह पर बर्फ की मोटी चादर ऑक्‍सीजन को यूरोपा के समुद्र तक पहुंचने से रोकती है।  हालांकि एक नई रिसर्च में यह कहा गया है कि यूरोपा के समुद्र तक ऑक्‍सीजन पहुंच रही है। इसका तरीका थोड़ा अलग है। रिसर्चर्स का कहना है कि यह ऑक्‍सीजन को उसकी बर्फीली सतह के नीचे खींच रहा है। रिसर्चर्स के मुताबिक यूरोपा के बर्फीले शेल में खारे पानी के पूल, इसकी सतह से ऑक्‍सीजन को समुद्र तक ले जा सकते हैं।  यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के प्रोफेसर मार्क हेसे की स्‍टडी से यह भी पता चलता है कि यूरोपा के महासागरों में ऑक्सीजन ...

शुक्र ग्रह में ऑक्‍सीजन! Nasa के पार्कर सोलर प्रोब की तस्‍वीरों से साइंटिस्‍ट हैरान

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नासा (NASA) के पार्कर सोलर प्रोब (Parker Solar probe) ने शुक्र की पहली तस्‍वीरों को कैद किया है। शुक्र ग्रह  आमतौर पर घने बादलों में लिपटा होता है। नासा के मुताबिक, पार्कर सोलर प्रोब ने हाल ही में दो फ्लाईबाईज के दौरान अपने वाइड-फील्ड इमेजर और WISPR का इस्‍तेमाल करते हुए तस्‍वीरें लीं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि शुक्र ग्रह की ये तस्‍वीरें इस ग्रह के भूविज्ञान और खनिज संरचना को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगी। नासा ने कहा कि ये इमेजेस महाद्वीपीय क्षेत्रों, मैदानों और पठारों जैसी विशेषताओं के बारे में बताती हैं। इस ग्रह के वातावरण में ऑक्सीजन का चमकदार प्रभामंडल (halo) है। शुक्र और पृथ्वी के बीच इस समानता को देखते हुए वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि शुक्र ग्रह क्यों दुर्गम हो गया और क्‍यों पृथ्‍वी में जीवन का स्‍वागत हुआ।  नासा के हेडक्‍वॉर्टर में हेलियोफिजिक्स डिवीजन की डिवीजन डायरेक्टर- निकोला फॉक्स ने कहा कि हम पार्कर सोलर प्रोब से मिली तस्‍वीरों से रोमांचित हैं। ये इमेजेस शुक्र ग्रह को लेकर चल रहीं रिसर्च को अप्रत्‍याशित तरीके से आगे ले जा सकती हैं।  जियोफिजिकल रिसर्च लेटर...