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कोर्ट जिस दिन जमानत पर रिहाई के आदेश दे, उसी दिन पूरी होनी चाहिए सारी प्रक्रिया : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा संबंधित जेल रिहाई के कागजात उसी दिन कैदी को दिये जाने चाहिये.  नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को साफ किया है कि कि जिस दिन जमानत (Bail) पर रिहाई का आदेश अदालत दे, उसी दिन जमानत की कार्यवाही पूरी हो जानी चाहिए. उसी दिन जमानत के आदेश संबंधी कागजात संबंधित जेल भी भेजे जाएं. संबंधित जेल रिहाई के कागजात उसी दिन कैदी को दें. यह आदेश जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस रवींद्र भट  और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने दिया है. आपराधिक ट्रायल में खामियों को लेकर स्वत: संज्ञान मामले में ये आदेश जारी किए गए हैं. यह भी पढ़ें सुनवाई करने वाली पीठ ने कहा कि जमानत मंजूर करने से संबंधित नियमों के तहत गैर जमानती मामलों में साधारणतया जमानत की अर्जी पर पहली सुनवाई के तीन से सात दिनों में अदालत को हां या ना का फैसला ले लेना चाहिए. अगर इस अवधि में जमानत अर्जी का निपटारा न हो पाए तो अदालत को आदेश में समुचित कारण बताने चाहिए कि देरी की वजह क्या है? आरोपी को आदेश की प्रति, जमानत अर्जी का जवाब और पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट भी आदेश जारी करते समय मौजूद रहनी चाहिए . इस मामले में ...

'क्या कोई खाली बैठा है?', सांप्रदायिक हिंसा पर न्यायिक जांच आयोग की मांग वाली अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार

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सुप्रीम कोर्ट मे कहा कि ऐसी मांग मत कीजिए जिसे पूरा नहीं किया जा सके नई दिल्ली: रामनवमी और हनुमान जंयती के अवसर पर दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई सांप्रदायिक हिंसा की न्यायिक जांच और बुलडोजर न्याय के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अदालत ने याचिका कर्ता एडवोकेट विशाल तिवारी से कहा कि ऐसी मांग मत कीजिए जिसे पूरा न किया जा सके. जस्टिस नागेश्वर राव ने कहा कि आपने मांगा है कि पूर्व CJI की अगुवाई में जांच कराई जाए. क्या कोई खाली बैठा है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी मांग मत कीजिए जिसे पूरा न किया जा सके. यह भी पढ़ें गौरतलब है कि एडवोकेट विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर कर रामनवमी और हनुमान जंयती के अवसर पर राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात में हुई धार्मिक झड़पों की जांच के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने का निर्देश देने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश में "बुलडोजर न्याय" की मनमानी कार्रवाई की जांच के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता क...

दिल्ली में भी चला बुलडोजर : तोड़ा गया जूस स्टॉल, दुकानदार ने कहा- नगर निगम की मंजूरी थी, लेकिन...

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जहांगीरपुरी में बुधवार करीब दो घंटे तक चले बुलडोजर चलाए गए और दुकानों को तोड़ा गया. नई दिल्ली: दिल्ली के जहांगीरपुरी में बुधवार करीब दो घंटे तक चले बुलडोजर ने गणेश गुप्ता की जूस की दुकान भी तोड़ दी. हालांकि, बुलडोजर की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोक दिया गया. उन्होंने बताया कि उनका ये स्टॉल निकाय की मंजूरी के साथ चला रहा था. एनडीटीवी से बात करते हुए गुप्ता ने बताया, 'मेरी दुकान मेरे पिता के नाम पर है. मैंने उनसे कागजात देखने के लिए कहा. लेकिन उन्होंने नहीं सुना, उन्होंने दुकान पर बुलडोजर चला दिया.' यह भी पढ़ें किसी भी दुकानदार या स्थानीय लोगों को बिना किसी अग्रिम सूचना के बुलडोजर चलाया गया. जिसे विपक्षी नेताओं ने "अवैध" करार दिया है. ढाई घंटे में नौ बुलडोजरों ने 20 से अधिक दुकानों, ठेलों और यहां तक ​​कि मस्जिद के बाहरी द्वार को भी गिरा दिया, जो हनुमान जयंती के दौरान हिंसा का केंद्र था. ये भी पढ़ें-  दिल्ली में भी चला बुलडोजर : तोड़ा गया जूस स्टॉल, दुकानदार ने कहा- नगर निगम की मंजूरी थी, लेकिन... सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खबर आने पर भी अधिकारियों ने रु...

दिल्ली जहांगीरपुरी हिंसा : सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट की निगरानी में जांच की अपील

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नई दिल्ली: दिल्ली में जहांगीरपुरी हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना के समक्ष एक पत्र याचिका दायर की गई है, जिसमें अदालत से स्वत: संज्ञान लेकर कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट से जहांगीरपुरी हिंसा की निष्पक्ष जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के  मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का आग्रह किया गया है.  यह भी पढ़ें वकील ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस की अब तक की जांच पक्षपाती, सांप्रदायिक और दंगों की तैयारी करने वालों को सीधे तौर पर बचाने वाली रही है.  इस अदालत ने 2020 में दंगों को रोकने में विफल रहने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी. वकील अमृतपाल सिंह खालसा ने पत्र में कहा कि 2020 के दंगों में दिल्ली पुलिस की छवि कमजोर हुई है और लोगों का उस पर विश्वास कम हुआ है. वकील ने कहा कि ऐसा दूसरी बार है जब राजधानी में दंगे भड़के हैं, हालांकि केवल "अल्पसंख्यक" समुदाय के सदस्यों को दोषी ठहराया जाएगा. मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा करते हुए पत्र याचिका में कहा गया है कि हनुमान जयंती शोभा यात्रा जुलूस में शामिल कु...

छावला रेप और हत्‍याकांड केस : तीन दोषियों की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि तीनों दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी जाए या नहीं नई दिल्‍ली : वर्ष 2012 के दिल्ली के छावला रेप और हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन दोषियों की मौत की सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि तीनों की मौत की सजा बरकरार रखी जाए या नहीं. इस केस को 'दूसरा निर्भया केस' कहा जाता है. जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा. दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा कम करने की अर्जी का विरोध किया है. पुलिस की ओर से ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि ये अपराध सिर्फ पीड़िता के साथ नहीं, बल्कि पूरे समाज के साथ हुआ है. दोषियों को कोई रियायत नहीं दी जा सकती क्योंकि उन्होंने ऐसा वहशियाना अपराध किया है. ये ऐसा अपराध है जिसके कारण मां-पिता बेटियों को सांझ ढले घर के बाहर नहीं रहने देते. दोषियों ने न केवल युवती से सामूहिक बलात्कार किया बल्कि उसके मृत शरीर का अपमान भी किया.  यह भी पढ़ें वहीं, तीनों दोषियों की ओर से अदालत में दोषियों की उम्र, पारिवारिक पृष्ठभूमि और पूर्व इतिह...

...जब कोर्ट में पीड़िता के पिता से जज ने कहा - 'हाथ ना जोड़े, बैठ जाएं'

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सुप्रीम कोर्ट की एक तस्वीर नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के छावला में 2012 में हुए गैंगरेप और हत्या के मामले की सुनवाई के दौरान उस समय माहौल भावुक हो गया, जब पीड़िता के पिता कोर्ट रूम में अपना पक्ष रखने के लिए हाथ जोड़ कर खड़े हो गए. जस्टिस  उदय उमेश ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी. जिसने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.  यह भी पढ़ें दरअसल, पहले दोषियों के वकीलों ने अपना पक्ष रखा और मौत की सजा को कम करने की गुहार लगाई. फिर दिल्ली पुलिस की ओर से ASG ऐश्वर्या भाटी ने इसका विरोध किया. दोनों पक्षों के बाद पीड़ित परिवार की वकील ने पीठ से परिवार की दलीलें भी सुनने का आग्रह किया और बताया कि पीड़िता के पिता अदालत में मौजूद हैं. उसी समय पीड़िता के पिता हाथ जोड़कर खड़े हो गए और बेंच ने उनको देखा. बेंच की अगुवाई कर रहे जस्टिस ललित ने कहा कि वो पिता को हाथ जोड़े खड़े हुए देख रहे हैं लेकिन उनको कहा जाए की वो बैठ जाएं. छावला रेप और हत्‍याकांड केस : तीन दोषियों की मौत की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित ...

UPSC परीक्षा: कोविड प्रभावितों को अतिरिक्‍त मौका देने को लेकर SC में याचिका का केंद्र ने किया विरोध

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केंद्र सरकार ने कहा है, इस तरह अतिरिक्त प्रयास देने से अन्य उम्मीदवारों की संभावना प्रभावित होगी नई दिल्‍ली : संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में बैठने के लिए अतिरिक्त मौके की मांग के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. केंद्र ने इस हलफनामे में कहा है कि UPSC परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों को अतिरिक्त मौका नहीं दिया जाएगा. अगर UPSC परीक्षा में बैठने के लिए छात्रों मौका दिया गया तो देशभर में अन्य श्रेणियों में होने परीक्षा के छात्रों द्वारा भी इसी तरह की मांग की जाएगी. केंद्र सरकार ने इस हलफनामे में कहा है कि कोरोना की वजह से जनवरी में UPSC परीक्षा में नहीं बैठ पाने वाले छात्रों को अतिरिक्त मौका देना संभव नहीं है. हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि चार्टर्ड एकाउंटेंसी परीक्षा के लिए इस तरह के अतिरिक्त प्रयास की अनुमति नहीं देने पर हाईकोर्ट ने भी इसी तरह की याचिका खारिज कर दी थी. इस तरह का अतिरिक्त प्रयास देने से अन्य उम्मीदवारों की संभावना प्रभावित होगी क्योंकि इससे उम्मीदवारों की संख्या में वृद्धि होगी. मामले को लेकर कल सुनवाई होगी यह भी पढ़ें  दर...

तरक्‍की में आरक्षण की नीति रद्द करने का असर 4.5 लाख कर्मचारियों पर पड़ेगा : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र

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प्रतीकात्‍मक फोटो नई दिल्‍ली : पदोन्नति में आरक्षण के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. केंद्र ने मामले में दलील देते हुए कहा है कि SC के फैसले से अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को सरकारी सेवा के दौरान तरक्की में आरक्षण की नीति रद्द करने का असर सीधे-सीधे 4.5 लाख कर्मचारियों पर पड़ेगा, इससे इन कर्मियों में असंतोष बढ़ेगा.केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि तरक्की यानी प्रमोशन में आरक्षण का असर आरक्षित वर्ग में आने वाले साढ़े चार लाख कर्मचारियों अधिकारियों पर पड़ेगा.ये असर 2007 से 2020 के दौरान सरकारी सेवाओं में तरक्की पाने वालों पर पड़ रहा है. 2017 में दिल्ली हाईकोर्ट से रद्द हुई तरक्की में आरक्षण की अपनी नीति की हिमायत करते हुए केंद्र सरकार की दलील है कि उस नीति से किसी पर उल्टा या नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा था क्योंकि प्रमोशन आरक्षण वर्ग के उन्हीं अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया जा रहा था जिनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा और वो निर्धारित अर्हता पूरी करते थे.  यह भी पढ़ें Source link https://myrevolution.in/politics/%e0%a4%a4%e0%a4%b0...

हिन्दुओं को भी अपने यहां अल्पसंख्यक घोषित कर सकते हैं राज्य :  केंद्र सरकार

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अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा है कि हिंदू, यहूदी, बहाई धर्म के अनुयायी उन राज्यों में अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं और उन्हें चला सकते हैं.राज्य के भीतर अल्पसंख्यक के रूप में उनकी पहचान से संबंधित मामलों पर राज्य स्तर पर विचार किया जा सकता है. सरकार ने कहा, ‘यह कानून कहता है कि राज्य सरकारें भी राज्य की सीमा में धार्मिक और भाषायी समुदायों को अल्पसंख्यक समुदाय घोषित कर सकती हैं. उदाहरण के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सीमा में यहूदियों को अल्पसंख्यक घोषित किया है. जबकि कर्नाटक सरकार ने उर्दू, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी, तुलु, लमणी, हिंदी, कोंकणी और गुजराती भाषाओं को अपनी सीमा में अल्पसंख्यक भाषा अधिसूचित किया है. केंद्र ने कहा, राज्य भी अल्पसंख्यक समुदाय अधिसूचित कर सकते हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यहूदी, बहाई और हिंदू धर्म के अनुयायी जो लद्दाख, मिजोरम, लक्षद्वीप, कश्मीर, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में वास्तविक अल्पसंख्यक हैं, वे वहां अपनी पसंद से शैक्षणिक संस्थान की स्थापना और संचालन नहीं कर सकते, गलत ह...

यूनिटेक मामला : सुप्रीम कोर्ट यूनिटेक प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी को दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की दी इजाजत  

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प्रीति चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत मांगी थी. नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद यूनिटेक (Unitech) के प्रमोटर संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा (Preeti Chandra) को अपनी दादी के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने की इजाजत दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने  प्रीति चंद्रा को एक दिन के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच जेल से बाहर जाने की अनुमति दी. अदालत ने कहा कि वह पुलिस एस्कॉर्ट के तहत बाहर आएगी और फोन या किसी संचार उपकरण का उपयोग नहीं करेगी. दरअसल प्रीति चंद्रा ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अर्जी दाखिल कर अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आदेश देने की इजाजत मांगी थी. फ्लैट बायर्स से फर्जीवाड़ा करने के मामले में संजय चंद्रा और उनके भाई अजय चंद्रा भी मुंबई की जेल में बंद हैं. यह भी पढ़ें इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व यूनिटेक प्रमोटर रमेश चंद्रा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले  में सुनवाई कर रही विशेष अदालत से जमानत का अनुरोध करने की अनुमति दे दी थी. प्रवर्तन निदेशालय की ओर से यह केस रियल एस्टेट दिग्गज व उ...

‘नींबूज़’ नींबू पानी है या फलों का रस, सुप्रीम कोर्ट करेगा परीक्षण

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आराधना फूड कम्पनी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है नई दिल्‍ली : सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने इस बात पर विचार करने की सहमति जताई है कि 'नींबूज़' पर उत्पाद शुल्क तय करने के लिए इसे 'नींबू पानी' के तौर पर वर्गीकृत किया जाए या 'फलों के पल्प या रस से बने ड्रिंक' के तहत. आराधना फूड्स नामक कंपनी की अपील थी कि इसे इसके वर्तमान वर्गीकरण के बजाय 'नींबू पानी' कहा जाए. गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स (GST) को लेकर सामने आए इस विवाद पर जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बी वी नागरत्ना की बेंच अब सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हैदराबाद सेंट्रल एक्साइज आयुक्त की याचिका पर आराधना फूड कम्पनी  को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, 27 अप्रैल तक ये जवाब मांगा गया है. यह भी पढ़ें Source link https://myrevolution.in/politics/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%9c%e0%a4%bc-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a5%82-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%af/?feed_id=17964&_unique_id=62401abfe7b3a

33 साल पुराने केस में नवजोत सिद्धू की सजा बढ़ाने की पुनर्विचार याचिका पर SC ने फैसला रखा सुरक्षित

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नवजोत सिद्धू की सजा बढ़ाने की पी‍ड़‍ित परिवार की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा नई दिल्‍ली : Road rage case:सुप्रीम कोर्ट ने 33 साल पुराने रोड रेज केस में नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Sidhu )की सजा बढ़ाने की पी‍ड़‍ित परिवार की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है. SC ने  सभी पक्षों की दलीलें सुनने को बाद फैसला सुरक्षित रखा.   सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  यह तय करेगा कि सिद्धू की सजा बढ़ाई जाए या नहीं. इससे पहले, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें उस समय बढ़ गईं थीं जब SC ने साधारण चोट की बजाए गंभीर अपराध की सजा देने की याचिका पर सिद्धू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.  दरअसल, पीड़ित परिवार ने याचिका दाखिल कर रोड रेज केस में साधारण चोट नहीं, बल्कि गंभीर अपराध के तहत सजा बढ़ाने की मांग की है. इससे पहले] सुप्रीम कोर्ट ने साधारण चोट का मामला बताते हुए सिर्फ ये तय करने का फैसला किया था कि क्या सिद्धू को जेल की सजा सुनाई जाए या नहीं.  यह भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विशेष पीठ में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजय किशन कौल के सामने प...

अभ्‍यर्थी के परीक्षा में शामिल न होने पर पुन: परीक्षा का प्रावधान नहीं : UPSC ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

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प्रतीकात्‍मक फोटो नई दिल्‍ली : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी कारण से निर्धारित तिथि पर परीक्षा में शामिल होने में विफल रहता है, जिसमें बीमारी या दुर्घटना के कारण परीक्षा देने में असमर्थता शामिल है, तो फिर से परीक्षा आयोजित करने का कोई प्रावधान नहीं है.शीर्ष अदालत तीन उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिन्होंने यूपीएससी-2021 प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी लेकिन कोविड-19 संक्रमित पाए जाने के बाद मुख्य परीक्षा के सभी पेपरों में उपस्थित नहीं हो सके और अब परीक्षा में बैठने के लिए एक अतिरिक्त मौका दिए जाने की मांग कर रहे हैं. यह भी पढ़ें Source link https://myrevolution.in/politics/%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e2%80%8d%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/?feed_id=17447&_unique_id=623b479199dc3

PMLA प्रावधानों के तहत 17 साल में 98,368 करोड़ की अपराध की कमाई की हुई पहचान: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र

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सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में बहस अगले हफ्ते भी जारी रहेगी नई दिल्‍ली : प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्‍टर (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देने की याचिका पर केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)में दलीलें जारी रखी गई. केंद्र ने SC को बताया कि पिछले 17 वर्षों में PMLA के तहत 98,368 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई की पहचान हुई और अटैच की गई. इस अवधि में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच के लिए 4,850 मामले उठाए गए हैं.अपराध की आय की कुर्की में संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन और कथित ड्रग्स तस्कर इकबाल मिर्ची की संपत्ति शामिल है.आतंकवाद और नक्सल फंडिंग के 57 मामलों की जांच में 1,249 करोड़ रुपये की अपराध की आय की पहचान हुई है  यह भी पढ़ें जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस  दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सी टी रवि कुमार की बेंच के समक्ष SG तुषार मेहता ने लगातार दूसरे दिन बहस जारी रखी. उन्होंने कहा कि 17 साल में की गई 2,883 सर्च की गईं. 256 संपत्तियों के माध्यम से 982 करोड़ रुपये की अपराध की आय अटैच हुई...

'चिदंबरम ने 2014 में कैबिनेट की सिफारिश के बिना दिया OROP पर बयान' : केंद्र ने SC में किया अपना बचाव

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सरकार ने विसंगति के लिए पी चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया (फाइल फोटो) नई दिल्ली: सशस्त्र बलों में वन रैंक वन पेंशन (OROP) को लेकर सोमवार को शीर्ष न्यायालय में सुनवाई हुई. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष वन रैंक वन पेंशन (OROP) पर अपना बचाव किया. सरकार ने 2014 में संसदीय चर्चा बनाम 2015 में वास्तविक नीति के बीच विसंगति के लिए पी चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया. केंद्र ने 2014 में संसद में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर विसंगति का आरोप लगाया. केंद्र ने कहा कि चिदंबरम का 2014 का बयान तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश के बिना दिया गया था.  यह भी पढ़ें केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किया. केंद्र ने कहा कि रक्षा सेवाओं के लिए OROP की सैद्धांतिक मंजूरी पर बयान तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा 17 फरवरी, 2014 को तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश के बिना दिया गया था. दूसरी ओर, कैबिनेट सचिवालय ने 7 नवंबर, 2015 को भारत सरकार (कारोबार नियमावली) 1961 के नियम 12 के तहत प्रधानमंत्री की मंजूरी से अवगत कराया. सुप्रीम कोर्ट 23 फरवरी को अब इसे मामले पर सुनवाई करेगा.  16 फरवरी...

''वन रैंक, वन पेंशन कैसे लागू किया जा रहा, कितने लोगों को हुआ लाभ'' : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल

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वन रैंक, वन पेंशन मामले में सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई 23 फरवरी को करेगा नई दिल्‍ली : सशस्‍त्र बलों में 'वन रैंक वन पेंशन' ( One Rank One Pension या OROP)को लेकर  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने अहम सवाल उठाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, 'केंद्र की अतिशयोक्ति OROP नीति पर  आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत करती है जबकि इतना कुछ सशस्त्र बलों के पेंशनरों को मिला नहीं है.' इसके साथ ही SC ने केंद्र से पूछा है कि  OROP कैसे लागू किया जा रहा है और इससे कितने लोगों को लाभ हुआ है? सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने संसदीय चर्चा और नीति के बीच विसंगति पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों का हवाला दिया. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि समस्या यह है कि पॉलिसी पर आपकी अतिशयोक्ति वास्तव में दिए गए लाभ तुलना में बहुत अधिक आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत करती है. इस पर केंद्र ने अपना बचाव करते हुए कहा कि नीति पर फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लिया है. यह भी पढ़ें NIA का जम्मू-कश्मीर में बड़ा एक्शन, आतंकवाद से जुड़े मामलों में कई जगहों पर छापे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बताया कि OROP की अभी तक कोई वैधानिक...

प्रतिष्ठा का प्रश्न न बनाएं : सुसाइड मामले की जांच CBI से करवाने के मामले में तमिलनाडु सरकार से SC

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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि हाईकोर्ट द्वारा CBI जांच के आदेश को “ प्रतिष्ठा का मुद्दा" ना बनाएं नई दिल्ली: तमिलनाडु (Tamilnadu) में 17 साल की छात्रा लावण्या की मौत के  मामले की CBI जांच जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फिलहाल CBI जांच में दखल देने से इनकार किया है हालांकि तमिलनाडु DGP की याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता और CBI को नोटिस देकर जवाब मांगा है. तमिलनाडु की ओर से DGP की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि ये जहर खाकर खुदकुशी का मामला है, लेकिन हाईकोर्ट इसमें लगातार आदेश दे रहा है. ये कोई धर्म परिवर्तन का मामला नहीं है. सीबीआई को सौंपे जाने के खिलाफ तमिलनाडु पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. यह भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से कहा कि हाईकोर्ट द्वारा CBI जांच के आदेश को “ प्रतिष्ठा का मुद्दा" ना बनाएं.  राज्य पुलिस द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को सीबीआई को सौंपा जाए. राज्य के DGP ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस फैसले को चुनौती दी है. DGP ने कहा है कि हाईकोर्ट के CBI जांच...

'लव जिहाद' लॉ पर गुजरात सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार

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हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले का परीक्षण करने का फैसला किया है. (फाइल फोटो) नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने लव जिहाद कानून (Love Jihad Law) पर राहत की उम्मीद लगाए गुजरात सरकार (Gujarat Government) को बड़ा झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वह हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं दे सकता. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले का परीक्षण करने का फैसला किया  है. यह भी पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है. इससे पहले हाईकोर्ट ने कहा था कि जब तक ये साबित नहीं हो जाता कि लड़की को लालच देकर फंसाया गया है, तब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ लव जेहाद कानून के तहत FIR दर्ज नहीं की जा सकती.  दरअसल, पिछले साल अगस्त में  "लव जिहाद" विरोधी कानून को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया था. हाईकोर्ट ने लव जिहाद कानून की कुछ धाराओं को लागू करने से रोक दिया था. हाईकोर्ट ने ये फैसला जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनाया था. जमीयत ने इस कानून पर रोक लगाने की मांग की थी. गुजरात सरकार न...

देश में वैवाहिक विवादों से संबंधित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही : सुप्रीम कोर्ट

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धारा 498-ए ससुराल में पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा स्त्री के उत्पीड़न से संबंधित अपराध के बारे में है. न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कई मौकों पर धारा 498-ए के ‘दुरुपयोग' पर चिंता व्यक्त की है. पीठ ने बिहार में एक महिला द्वारा उसके ससुराल वालों के खिलाफ कथित तौर पर क्रूरता के लिए दर्ज प्राथमिकी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ स्पष्ट आरोपों के अभाव में मुकदमा चलाने की अनुमति देने से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. उच्चतम न्यायालय ने पटना उच्च न्यायालय के नवंबर 2019 के उस आदेश के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाया, जिसमें पति और उसके कुछ रिश्तेदारों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया गया था. याचिका में उन्होंने कथित अपराधों के लिए अप्रैल 2019 में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया था. उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आईपीसी की धारा 498-ए को शामिल करने का उद्देश्य किसी महिला के खिलाफ उसके पति और उसके ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता को रोकना था, जिससे मामले में तेजी से हस्तक्षेप क...

'हाई स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में न्यायिक हस्तक्षेप राष्ट्रहित में नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का आदेश

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जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने सोमवार को ये फैसला सुनाया. नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाई स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट (High Speed Bullet Train Project) पर अहम टिप्पणी की है और कहा है कि द्विपक्षीय समझौते पर विदेशी फंडिंग वाली मेगा परियोजनाओं में न्यायिक हस्तक्षेप राष्ट्रहित में नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इससे प्रोजेक्ट में देरी होगी जो व्यापक जनहित में नहीं हो सकता है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है, जिसमें नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHDRCL) को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के संबंध में एक डिपो बनाने और विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी मोंटेकार्लो लिमिटेड की बोली पर विचार करने का निर्देश दिया गया था. यह भी पढ़ें जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस  एएस बोपन्ना की पीठ ने सोमवार को ये फैसला सुनाया. पीठ ने कहा कि ये परियोजना 'राष्ट्रीय महत्व' की है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के अगस्त 2021 में दिए गए फैसले को भी रद्द कर दिया है. पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अदालतों द्वारा इस तरह का हस्तक्ष...