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समुद्र के नीचे फट गया ज्‍वालामुखी, इसे Nasa ने ‘शार्ककैनो’ क्‍यों कहा? जानें सबकुछ

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) हमें ना सिर्फ स्‍पेस के रहस्‍यों से रू-ब-रू करवाती है, बल्कि पृथ्‍वी में होने वाली घटनाओं की भी साक्षी बनाती है। वीडियो और इमेजेस के जरिए हम दुनिया को नए नजरिए से देख पाते हैं। इसी क्रम में नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर ने प्रशांत महासागर में पानी के नीचे हुए ज्वालामुखी विस्फोट की तस्वीर ट्वीट की है। बात यहीं खत्‍म नहीं होती। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने इस घटना को शार्ककैनो (Sharkcano) कहा है। इसकी वजह यह है कि जिस जगह ज्‍वालामुखी में यह विस्‍फोट हुआ है, वहां शार्क की दो प्रजातियां रहती हैं यानी यह जगह उनका निवास है। इस तस्‍वीर को लैंडसेट-9 सैटेलाइट ने क्लिक किया है, जो बताती है कि मौजूदा जगह पर समुद्र में काफी हलचल है।  नासा ने बताया है कि सोलोमन द्वीप में कवाची ज्वालामुखी शार्क की दो प्रजातियों का घर है। एजेंसी के मुताबिक, यह इलाका प्रशांत क्षेत्र में सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। इन्‍हीं में से एक ज्‍वालामुखी को जो पानी के अंदर है, लैंडसैट-9 ने फटते हुए देखा है। नासा ने ट्विटर पर इससे जुड़ीं इमेजेस शेयर की हैं और लिखा है, क्‍या ...

स्‍टडी में दावा- टोंगा के समुद्र में फटा ज्‍वालामुखी था 140 साल का सबसे बड़ा विस्‍फोट

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दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित देश टोंगा (Tonga) में इस साल की शुरुआत में एक ज्‍वालामुखी (volcano) फट गया था। यह ज्‍वालामुखी समुद्र के नीचे फटा था, जिसने बड़े स्‍तर पर दबाव वाली लहरें या शॉक वेव्‍स पैदा कीं, जिनमें से कुछ पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरीं। इन शॉक वेव्‍स की वजह से 10 हजार किलोमीटर दूर अमेरिका के राज्य अलास्का में भी लोगों ने पानी में शोर और उछाल आने की जानकारी दी। अब दो नई स्‍टडीज से पता चला है कि यह पिछले 140 साल में सबसे बड़ा विस्फोट है। टोंगा की घटना की तुलना 1883 में इंडोनेशिया में हुए क्राकाटाऊ विस्फोट से की गई है। उस उस भयावह घटना में 30 हजार से ज्‍यादा लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि सीमाउंट में कई हफ्तों की एक्टिविटीज के बाद यह विस्‍फोट हुआ। न्‍यूक्‍लियर टेस्‍ट बैन ट्रीटी (CTBT) का पालन करने के लिए लगाए गए डिटेक्‍टरों ने इस विस्‍फोट से हुए सिग्‍नलों को नोट‍िस किया। बताया जाता है कि इससे जो ऊर्जा निकली थी, वह 100 हिरोशिमा बमों के स्केल के बराबर थी।   टोंगा में जब पानी के नीचे ज्वालामुखी फटा, तो उसने हमारे वायुमंडल की तीसरी लेयर मेसोस्फीयर से टकराने के लिए...

अहम खोज : वैज्ञानिकों को इस ग्रह पर मिले बर्फ के ज्वालामुखी

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रहस्‍यों से भरा ब्रह्मांड वैज्ञानिकों को हर रोज कुछ ना कुछ जानने के लिए प्रेरित करता है। अब प्‍लूटो ग्रह को लेकर नासा ने नई जानकारी है। नासा के न्यू होराइजन्स अंतरिक्ष यान से मिला डेटा बताता है कि यह ठंडा ग्रह पहले से ज्‍यादा गतिशील है। यहां गुंबद के आकार वाले बर्फ के ज्वालामुखी हैं, जो अभी भी एक्टिव हो सकते हैं। मंगलवार को वैज्ञानिकों ने कहा कि 10 से ज्‍यादा क्रायोवोल्कैनो एक किलोमीटर से लेकर 7 किलोमीटर के एरिया में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जैसे पृथ्वी के ज्वालामुखियों से गैसें और पिघली हुई चट्टानों का लावा निकलता है, उसी तरह से ये क्रायोवोल्कैनो बड़ी मात्रा में बर्फ निकालते हैं। इसमें जमे हुए पानी के साथ-साथ कुछ और भी हो सकता है। नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखक और कोलोराडो में साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्‍लेनेटरी साइंटिस्‍ट केल्सी सिंगर ने कहा, इन फीचर्स को खोजने से यह संकेत मिलता है कि प्लूटो अधिक सक्रिय या भूगर्भीय रूप से जीवित है। यहां बर्फ होने की संभावना आश्चर्यजनक है। गौरतलब है कि प्‍लूटो ग्रह का आकार पृथ्वी के चंद्रमा से भी छोटा है। इसका व्यास लगभग 1...

टोंगा में जलमग्न ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ

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First Published: January 17, 2022 | Last Updated:January 17, 2022 टोंगा (प्रशांत महासागर में एक देश) में हाल ही में एक पानी के नीचे एक ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ। इसे “हुंगा टोंगा हुंगा हापई” (Hunga Tonga Hunga Haapai) ज्वालामुखी कहा जाता है। यह विस्फोट बहुत बड़ा और जोरदार था। हालांकि ज्वालामुखी पानी के नीचे और 2,383 किमी दूर स्थित था, इसकी आवाज़ टोंगा में सुनी गई। इसके अलावा, इस विस्फोट ने सुनामी लहरें भी पैदा कीं। पिछले कुछ दिनों से ज्वालामुखी में विस्फोट हो रहा था। इसकी पहचान कुछ क्षेत्रों में अमोनिया और सल्फर की गंध से हुई। यह ज्वालामुखी भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में स्थित है। सुनामी लहरें ज्वालामुखी विस्फोट ने पास के समुद्र तटों और प्रशांत क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों में भी सुनामी लहरें पैदा कीं। इस प्रकार के ज्वालामुखी के कारण उत्पन्न होने वाली सुनामी तरंगों को उल्कापिंड सुनामी तरंगें (meteo tsunami waves) कहा जाता है। यह ज्वालामुखी के एक हिस्से के गिरने के कारण होता है। यह सुनामी लहरें दबाव में तत्काल परिवर्तन के कारण होती हैं जिससे बड़ी मा...

Nasa के पर्सवेरेंस मार्स रोवर ने मंगल पर खोजा सबसे पुराना निष्क्रिय ज्‍वालामुखी

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इस साल फरवरी में मंगल ग्रह पर लैंड करने के बाद नासा का पर्सवेरेंस Perseverance मार्स रोवर हमें कई खोजों के बारे में बताता आया है। जेज़ेरो क्रेटर Jezero Crater के चारों ओर लगभग 10 महीनों तक ड्राइविंग के बाद रिसर्चर्स ने यह समझना शुरू कर दिया है कि यह क्षेत्र संभवतः लंबे समय से निष्क्रिय मार्टियन ज्वालामुखी से बना है। नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से ग्रह के इतिहास को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। एक रिपोर्ट में नासा ने खुलासा किया कि क्रेटर चट्टानों ने अपनी उत्‍पत्‍त‍ि के बाद से कई बार पानी से इंटरेक्‍ट किया है। इन चट्टानों में कुछ ऑर्गनिक मॉलिक्‍यूल्‍स भी मौजूद हैं। नासा की रिसर्च टीम ने पर्सवेरेंस के मंगल ग्रह पर उतरने से पहले ही इन चट्टानों की उत्पत्ति के बारे में सोचा था। वैज्ञानिक अनुमान लगाते आए हैं कि चट्टानों का नेचर या तो सेडमेन्टरी (तलछटी) था या इग्नीअस (आग्नेय)। अब वह अपने जवाब के करीब पहुंच गए हैं।  अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने एक ट्वीट के जरिए यह घोषणा की। इस पोस्‍ट में लिखा था, मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर का बेस, NASA पर्सवेर लगभग 10 महीनों तक इसमें चलता ...