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तारे में विस्‍फोट से निकली गैसों को हबल टेलीस्‍कोप ने किया कैमरे में कैद

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कई साल से अंतरिक्ष के गहरे रहस्‍यों को सामने ला रहे हबल स्‍पेस टेलीस्‍कोप (Hubble Space Telescope) ने एक बार फ‍िर बेहतरीन तस्‍वीर से रू-ब-रू कराया है। टेलीस्‍कोप ने एक युवा तारे के साथ होने वाली घटना को कैप्‍चर किया है। नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने इसे ‘विस्पी स्ट्रक्चर' कहा है। वैसे इसे हर्बीग-हारो ऑब्जेक्ट (HH34) कहा जाता है। ट्विटर पर इमेज शेयर करते हुए ESA ने लिखा कि यह तस्‍वीर उस गैस की है, जो जेट जितनी हाईस्‍पीड से तारे के पास से गुजर रही है। इस वजह से ही ‘विस्पी स्ट्रक्चर' बना है। नासा ने कहा है कि ये चीजें कुछ साल में अनोखे ढंग से डेवलप हो सकती हैं।  तस्‍वीर को कैद करने के लिए हबल स्‍पेस टेलीस्‍कोप ने अपने ‘वाइड फील्ड कैमरा 3' का इस्‍तेमाल किया। ESA ने बताया है कि एक नवजात तारे में विस्‍फोट की वजह से यह गैस निकलीं। आमतौर पर किसी तारे के बनने के शुरुआती वक्‍त में ऐसे वाकये होते हैं। इस वजह से निकलने वाली गैस सुपरसोनिक स्‍पीड से आगे बढ़ती हैं। ऐसा ही कुछ मौजूदा इमेज में भी दिखाई दे रहा है।  हर्बिग-हारो ऑब्‍जेक्‍ट्स तब बनते हैं, जब गैस का जेट अप...

GAIL ने प्राकृतिक गैस प्रणाली में हाइड्रोजन सम्मिश्रण के लिए भारत की पहली परियोजना लांच की

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First Published: February 4, 2022 | Last Updated:February 3, 2022 गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने इंदौर, मध्य प्रदेश में प्राकृतिक गैस प्रणाली में हाइड्रोजन को मिलाने के लिए भारत की अपनी तरह की पहली परियोजना शुरू की है। मुख्य बिंदु  हाइड्रोजन मिश्रित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति अवंतिका गैस लिमिटेड को की जाएगी, जो HPCL के साथ गेल की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है। यह इंदौर में कार्यरत्त है। गेल ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन (National Hydrogen Mission) के अनुरूप “हाइड्रोजन सम्मिश्रण कार्यक्रम” (hydrogen blending programme) शुरू किया है। हाइड्रोजन सम्मिश्रण कार्यक्रम को सिटी गैस वितरण (City Gas Distribution – CGD) नेटवर्क में सम्मिश्रण हाइड्रोजन की तकनीकी-व्यावसायिक व्यवहार्यता स्थापित करने के लिए एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। यह परियोजना हाइड्रोजन आधारित और कार्बन न्यूट्रल भविष्य की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Injection of Grey Hydrogen गेल द्वारा सिटी गेट स्टेशन, इंदौर में Injection of Grey Hydrogen शुरू किया गया...

वैज्ञानिकों ने खोज निकाला गैस और धूल के गुबार में छुपा हुआ ब्‍लैक होल

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नासा (NASA) की Chandra X-ray ऑब्‍जर्वेटरी की मदद से रिसर्चर्स ने एक ब्लैक होल की पहचान की है। यह ब्‍लैकहोल Mrk 462 नाम की आकाशगंगा में मिला है। यह सूर्य के द्रव्यमान का 200000 गुना है। Mrk 462 एक बौनी आकाशगंगा है, जिसमें कई सौ मिलियन तारे हैं। इसके मुकाबले हमारी आकाशगंगा में कई सौ बिलियन तारे हैं। 110 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित यह ब्‍लैकहोल, गैस और धूल की ज्‍यादा मात्रा होने से Mrk 462 आकाशगंगा में छुप गया था।  नासा ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि पहली बार एक बौनी आकाशगंगा में एक ‘अस्पष्ट' सुपरमैसिव ब्लैक होल पाया गया है। खगोलविद अक्सर आकाशगंगाओं के केंद्र में तारों की तीव्र गति की खोज करके ब्लैक होल का पता लगाते हैं, लेकिन मौजूदा उपकरणों की मदद से बौनी आकाशगंगाएं बहुत छोटी और मंद नजर आती हैं। उनमें कोई भी चीज का पता लगाना मुश्किल होता है। ब्लैक होल का पता लगाने के लिए खगोलविद एक दूसरी तकनीक का इस्‍तेमाल करते हैं। इसी वजह से इस ब्‍लैकहोल को खोजा जा सका है।  न्यू हैम्पशायर में डार्टमाउथ कॉलेज के जैक पार्कर ने अपने सहयोगी रयान हिकॉक्स के साथ इस रिसर्च को लीड किया। जैक प...

पाकिस्तान-कतर ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए

पाकिस्तान-कतर ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए