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स्कूलों में मिड डे मील बनाने वाली सहायिकाएं मानदेय न मिलने से मुसीबत में

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प्रतीकात्मक फोटो. नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 16 लाख बच्चों के लिए मिड डे मील बनाने वाली हेल्परों को 6-6 महीने से मानदेय नहीं मिला जिससे वे खुद भुखमरी के कगार पर हैं. मिड डे मील बनाने वाली इन महिलाओं को क्यों मानदेय नहीं मिला है, इस बारे में प्रशासन तकनीकी खामी को कारण बता रहा है.   यह भी पढ़ें हापुड़ के शिवगढ़ी प्राथमिक  विद्यालय में 60 साल की गीता शर्मा बच्चों के लिए मिड डे मील बनाती हैं. इसके ऐवज में उनको हर महीना 1500 रुपये मिलते हैं. लेकिन येह मानदेय भी सात महीने से नहीं आया है. गीता शर्मा कहती हैं कि ''कैसे अपने बच्चों सा पेट भरें? यहां आकर खाना बनाते हैं और 8-8 महीने हो जाते हैं, पैसे नहीं मिलते हैं. कैसे काम करें.'' गीता शर्मा अकेले नहीं हैं, मोहसिना के पति बीमार हैं. वे भी अपना घर चलाने के लिए सरकारी स्कूल में मिड डे मील बनाती हैं लेकिन उनका भी मानदेय नहीं मिला है. मोहसिना ने कहा कि ''मेरा पति बीमार रहता है, मैं यहां खाना भी बनाती हूं, फिर मजदूरी करने भी जाती हूं. लेकिन पैसे ही नहीं मिल रहे हैं.'' शिवगढ़ी के...

कोविड महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई से पिछड़े बच्‍चे, गुणा-भाग, मामूली जोड़-घटाना भी नहीं कर पा रहे

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प्रतीकात्‍मक फोटो मुंबई : Mumbai: कोविड महामारी का बच्‍चों की पढ़ाई-लिखाई पर विपरीत असर पड़ा है. कोरोना के दौरान ऑनलाइन क्लासेज़ ने स्कूली बच्चों की समझ और पढ़ाई  को दो साल पीछे धकेल दिया है. 10वीं के बच्चों को गुणा-भाग-जोड़-घटाने का फिर से 'रिवीजन' करवाना पड़ रहा है. बोर्ड परीक्षा नज़दीक है, ऐसे में 100% ऑफलाइन क्लास ज़रूरी करने पर ज़ोर दिया जा रहा है. स्कूलों में क़रीब 75-80% अटेंडेंस है लिहाज़ा शिक्षकों को ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों मोड संभालने में मुश्किल हो रही है. कोरोना के मामले कम होने के बाद अब, जब बच्चे अपने अपने स्कूल लौटे हैं तो पता चल रहा है कि बीते दो साल की ऑनलाइन पढ़ाई ने इनका कितना नुक़सान किया. मुंबई में 9वीं कक्षा की छात्राएं बताती हैं कि ये गुणा-भाग भी भूल गई हैं नौवीं कक्षा की एक छात्रा ने कहा, 'मैं डिवाइड और मल्टिप्लाई करना भूल गयी थी, टीचर ने फिर समझाया तो अब समझ में आया है.' एक स्‍कूली छात्र ने कहा, 'घर में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान हम ढंग से कुछ समझ नहीं पाते थे. दो साल पहले का पढ़ाया सब भूल गए थे. टीचर की आवाज़ भी कई बार सुनाई नहीं देती थी…नेटवर्क...

स्कूलों को फिर से खोलने के लिए केंद्र ने कोविड दिशा निर्देशों में किया संशोधन, यह हैं जरूरी शर्तें

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"सोशल डिस्टेंसिंग" वाक्यांश को अब "फिजिकल डिस्टेंसिंग" से बदल दिया जाएगा. नई दिल्ली: कोरोना के केस कई राज्यों में कम होने पर स्कूल एक ​बार फिर से खोलने को लेकर केंद्र ने कोविड दिशा निर्देशों में संशोधन किया है. आज जारी स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए संशोधित दिशानिर्देश अनुसार अब राज्य तय करेंगे कि क्या स्कूलों को फिजिकल क्ला​सेस के लिए माता-पिता से सहमति मांगनी है या नहीं. इसके अलावा स्कूल में संगीत, खेल और कला में समूह गतिविधियों को राज्यों द्वारा जारी किए गए कोविड-19 के दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार अनुमति दी जा सकती है. शिक्षा मंत्रालय ने आज कहा कि 11 राज्यों में स्कूल पूरी तरह से खुले हैं और नौ में बंद हैं. यह भी पढ़ें कई अभिभावक और शिक्षक मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में फिजिकल क्लासेस फिर से शुरू की जाएं, उन्होंनेक ऑनलाइन कक्षाओं को अपर्याप्त पाया है. इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों तक पहुंच पर निर्भरता ने आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों और अन्य कमजोर वर्गों के छात्रों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है और कई विशेषज्ञ इसे "खोई हुई पीढ़ी" कहते...