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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (India’s Forex Reserve) 604.004 अरब डॉलर पर पहुंचा, लगातार पांचवें हफ्ते आई गिरावट

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First Published: April 16, 2022 | Last Updated:April 16, 2022 8 अप्रैल, 2022 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.471 बिलियन डॉलर की कमी के साथ 604.004 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में भारत चौथे स्थान पर है, इस सूची में चीन पहले स्थान पर है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, यह ऐसा पांचवा महीना है जिसमें गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी मुद्रा भंडार इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है तथा ये पूंजी खाते में होते हैं। ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं। इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये परन्तु इसमें विशेष आहरण अधिकारों, सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थि...

भारत का बाजार पूंजीकरण (market capitalization) विश्व में पांचवें स्थान पर पहुंचा

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First Published: March 15, 2022 | Last Updated:March 15, 2022 भारत का इक्विटी बाजार पहली बार बाजार पूंजीकरण के मामले में दुनिया के पांचवें स्थान पर पहुंचा। भारत की रैंक वर्तमान में भारत अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के बाद 5वें स्थान पर है। 2022 की शुरुआत में भारत 7 वें स्थान पर था। बाद में, भारत अपने बाजार पूंजीकरण में 7.4% की गिरावट के बावजूद दो स्थान उपर चढ़ गया। अब, भारत का कुल बाजार पूंजीकरण 3.21 ट्रिलियन डॉलर है। यूरोपीय देशों की रैंकिंग 2022 की शुरुआत में, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस पांचवें और छठे स्थान पर थे। हालांकि, उनकी रैंक गिर गई है और वर्तमान में वे क्रमशः छठे और नौवें स्थान पर हैं। जर्मनी कभी शीर्ष पांच बाजारों में से एक था, लेकिन अब इसकी रैंक दसवें स्थान पर आ गई है। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से यूरोपीय देशों के बाजार पूंजीकरण में अधिकतम गिरावट आई है, जो उनके रैंकों में गिरावट का कारण है। सऊदी अरब की रैंकिंग सऊदी अरब, जो पहले 10वें स्थान पर था, तीन स्थान चढ़ गया है और अब 7वें स्थान पर है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी, अरामको को तेल क...

वर्ष 2021 पृथ्वी का पांचवां सबसे गर्म साल था : अध्ययन

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First Published: January 12, 2022 | Last Updated:January 12, 2022 हाल ही में कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (Copernicus Climate Change Service) द्वारा एक रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, जो एक यूरोपीय संघ का कार्यक्रम है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि, 2021 पृथ्वी पर पांचवां सबसे गर्म वर्ष था। रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सात साल रिकॉर्ड पर सबसे गर्म रहे हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में निरंतर वृद्धि के कारण उन 12-महीने की अवधि में 2021 को पांचवें स्थान पर रखा गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि से पृथ्वी को अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि, पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में 2021 में औसत वैश्विक तापमान 1.1 से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक था। वैज्ञानिकों के अनुसार औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि से पृथ्वी को स्थायी नुकसान हो सकता है और इसका भारी हानिकारक पर्यावरणीय प्रभाव हो सकता है। यूरोप में सबसे गर्म ग्रीष्मकाल 2021 यूरोप में अत्यधिक तापमान और गर्मी ...