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3,330 किलो की टर्बाइन को समुद्र में डाल रहा जापान, खोज निकाला बिजली बनाने का नया तरीका

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समुद्र में अपार ऊर्जा समाई हुई है, जैसी पृथ्वी पर किसी दूसरी चीज में नहीं है, ऐसा वैज्ञानिक कहते हैं। अब समुद्र की इसी ऊर्जा को जापान ने इकट्ठा कर इस्तेमाल में लाने की सोची है। इसके लिए जापान विशाल 330 टन के टर्बाइन पावर जेनरेटर को सुमद्र की तलहटी में छोड़ने जा रहा है। यह विशाल टर्बाइन जेनरेटर समुद्र की सबसे शक्तिशाली लहरों में टिका रह सकता है और इन लहरों में जो ऊर्जा है, उसे असीमित बिजली सप्लाई में बदल सकता है।  इसे कैरयू (Kairyu) नाम दिया गया है। इसका नाम भी इसी तर्ज पर रखा गया है, जिसका मतलब समुद्री लहर होता है। इसका ढांचा 20 मीटर लम्बा है जो हवाई जहाज के आकार का है। यह दो सिलेंडरों से घिरा हुआ है और दोनों ही समान आकार के हैं। हरेक सिलेंडर में एक पावर जेनरेशन सिस्टम लगा है जो एक 11 मीटर लम्बे टर्बाइन ब्लेड से जुड़ा है।     इसे इशीक्वाजिमा हरिमा हैवी इंडस्ट्रीज ने तैयार किया है जिसे IHI Corporation के नाम से भी जाना जाता है। कंपनी इसके साथ 10 साल से भी अधिक समय से प्रयोग कर रही थी। 2017 में इसने New Energy Industrial Technology Development Organization के साथ पार्टनरशिप की ताकि अ...

भारत में 3.2 लाख करोड़ रुपये (42 अरब डॉलर) का निवेश करेगा जापान

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First Published: March 20, 2022 | Last Updated:March 20, 2022 हाल ही में जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा (Fumio Kishida) भारत की यात्रा पर आये हैं। उन्होंने नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के साथ मुलाकात की। मुख्य बिंदु इस दौरान जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि जापान अगले पांच वर्षों में भारत में 3.2 लाख करोड़ रुपये (42 अरब डॉलर) का निवेश करेगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रेस बयान में कहा कि भारत दुनिया के लिए ‘मेक इन इंडिया’ के लिए असीम संभावनाएं प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (Dedicated Freight Corridor) और मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (Mumbai-Ahmedabad High-Speed Rail) जैसी भारत की प्रमुख परियोजनाओं में जापान का सहयोग उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने इस योगदान के लिए जापान का आभार व्यक्त किया है। भारत-जापान भारत और जापान सालाना 2 + 2 वार्ता का आयोजन करते हैं। अमेरिका के बाद जापान ऐसा दूसरा देश है जिसके साथ भारत का ऐसा संवाद प्रारूप है। जापान को भारत पेट्रोलियम उत्पाद, रसा...

जापान के रेंकोजी मंदिर (Renkoji Temple) का सुभाष चन्द्र बोस से क्या सम्बन्ध है?

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First Published: January 24, 2022 | Last Updated:January 24, 2022 टोक्यो के रेंकोजी मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा 2005 में जापानी भाषा में भारत सरकार को लिखे गए एक पत्र के एक नए अनुवाद से पता चलता है कि न्यायमूर्ति एम.के. मुखर्जी को अस्थियों और राख के टुकड़ों का डीएनए परीक्षण करने की अनुमति दी गई थी। माना जाता है कि यह अस्थियाँ  नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की हैं। मुख्य बिंदु अतीत में, इस पत्र का अनुवाद नहीं किया गया था और अस्पष्ट कारणों से मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट के साथ एक अस्पष्ट संपादित अंग्रेजी संस्करण संलग्न किया गया था। बोस के लापता होने पर मुखर्जी आयोग की नियुक्ति की गई थी। डीएनए परीक्षण के मुद्दे के कारण आयोग आगे नहीं बढ़ सका। इस आयोग ने बाद में निष्कर्ष निकाला कि, यह राख/अस्थियाँ बोस की नहीं थी। ताजा अनुवाद उनके भाई शरत बोस की पोती माधुरी बोस के अनुसार, मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट में विसंगतियां पाए जाने के बाद, एक नया अनुवाद किया गया था। नए अनुवाद के साथ, यह पाया गया कि जापानी में लिखे गए पत्र के कई पैराग्राफ जस्टिस मुखर्जी पूछताछ रिपोर्ट के आधिकार...