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भारत-फ्रांस ने नीली अर्थव्यवस्था और महासागर शासन पर रोडमैप पर सहमती जताई

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First Published: February 23, 2022 | Last Updated:February 23, 2022 भारत और फ्रांस ने हाल ही में नीली अर्थव्यवस्था और महासागर शासन पर रोडमैप (Roadmap on Blue Economy and Ocean Governance) पर सहमति जताई है। मुख्य बिंदु दोनों देश वैज्ञानिक ज्ञान और महासागर संरक्षण में योगदान देने के उद्देश्य से इस रोडमैप पर सहमत हुए। वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कानून के शासन के आधार पर महासागर एक वैश्विक रूप से साझा बना रहे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की फ्रांस की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस रोडमैप के दायरे में समुद्री व्यापार, समुद्री उद्योग, समुद्री प्रौद्योगिकी, मत्स्य पालन, वैज्ञानिक अनुसंधान, समुद्री पर्यावरण पर्यटन, अंतर्देशीय जलमार्ग, एकीकृत तटीय प्रबंधन और नागरिक समुद्री मुद्दों पर सक्षम प्रशासन के बीच सहयोग शामिल होगा। दोनों देशों ने अपनी प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान करने, चल रहे और भविष्य के सहयोग का समर्थन करने और अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए नीली अर्थव्यवस्था और महासागर शासन पर एक वार्षिक द्विपक्ष...

SpaceX के 30 हजार सैटेलाइट लॉन्‍च करने के प्‍लान पर Nasa ने जताई चिंता

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एलन मस्‍क (Elon Musk) की स्‍पेसएक्‍स (SpaceX) दुनियाभर में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्‍च करने के लिए काम कर रही है। इसके लिए कंपनी एक के बाद एक स्‍टारलिंक सैटेलाइट अंतरिक्ष में पहुंचा रही है। कंपनी को 12 हजार सैटेलाइट लॉन्‍च करने के लिए इजाजत मिली है। इसमें से कई हजार सैटेलाइट लॉन्‍च किए जा चुके हैं। कंपनी ने सेकंड जेनरेशन वाले 30 हजार सैटेलाइट के लिए और अनुरोध किया है। इसी को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने चिंता जताई है।  रॉयटर्स के मुताबिक, सा ने फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन को लिखा है कि इससे कंजक्‍शन के मामलों में बढ़ोतरी होने और नासा के साइंस और ह्यूमन स्‍पेसफ्लाइट मिशन में असर पड़ने की संभावना है। नासा के मुताबिक, मौजूदा वक्‍त में ऑर्बिट में कुल 25,000 ऑब्‍जेक्‍ट हैं। और 600 किलोमीटर से नीचे लगभग 6100 ऑब्‍जेक्‍ट हैं। SpaceX द्वारा सेकंड जेनरेशन सैटेलाइट के विस्तार से ऑर्बिट में ऑब्‍जेक्‍ट की संख्या दोगुना हो जाएगी और 600 किलोमीटर से नीचे ऑब्‍जेक्‍ट की संख्‍या पांच गुना से ज्‍यादा बढ़ जाएगी।  अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी पैनल के अंतर्गत आने वाले हार्वर्ड-स्मिथसोनिय...

शून्य जुताई तकनीक (Zero Tillage Technology) क्या है?

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First Published: January 4, 2022 | Last Updated:January 4, 2022 शून्य जुताई तकनीक (Zero Tillage Technology) एक कृषि पद्धति है। यह स्थायी मिट्टी के आवरण (permanent soil cover) को बनाए रखती है। यह मिट्टी में होने वाली प्राकृतिक जैविक प्रक्रियाओं को बढ़ाती है। यह निरंतर फसल उत्पादन में सुधार करती है और मिट्टी के पोषण को बढ़ाती है।  शून्य जुताई तकनीक (Zero Tillage Technology) क्या है? भूमि जोतने का अर्थ है मिट्टी के कणों को उलटना, खोदना और हिलाना। यह खरपतवार को ख़त्म करने, फसल अवशेषों को समाप्त करने और मिट्टी को हवादार करने के लिए किया जाता है। हालांकि, जुताई करने से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना नष्ट हो जाती है। यदि अधिक मिट्टी का क्षेत्र सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है (जो आमतौर पर ट्रैक्टरों की मदद से जुताई करते समय होता है), तो मिट्टी की नमी बनाए रखने की क्षमता खो जाती है। दूसरी ओर, शून्य जुताई तकनीक में बिना जमीन की तैयारी के फसल के बीज बोए जाते हैं। और बीजों को मिट्टी में दबा दिया जाता है। जीरो टिलेज टेक्नोलॉजी के लाभ यह फसल की अवधि को कम करती है। इ...