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चंद्रमा पर कहां से आया पानी? चीनी वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सुराग!

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चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी को लेकर दुनियाभर में रिसर्च चल रही है। बीते दिनों हमने आपको जानकारी दी थी कि चीनी साइंटिस्‍ट चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स का परीक्षण कर रहे हैं। इन सैंपलों का विश्‍लेषण करने के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चंद्रमा के एक हिस्‍से में मिट्टी में पानी की मात्रा पहले के मुकाबले कम लगती है। इंटरनेशनल जरनल- नेचर कम्‍युनिकेशंस में पब्लिश एक पेपर में उनकी ओर से कहा गया है कि चांद से लाए गए सैंपल्‍स में मिले पानी का अहम हिस्‍सा चंद्रमा के इंटीरियर से आया होगा।   साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्‍ट की खबर के अनुसार, वैज्ञानिकों की टीम ने Chang'e 5 मिशन के जरिए चंद्रमा से लाए गए सैंपल्‍स को टेस्‍ट किया। ये सैंपल साल 2020 में पृथ्‍वी पर लाए गए थे। इस चीनी लैंडर ने चंद्रमा की सतह को स्‍कैन किया और सैंपल्‍स को इकट्ठा किया था।   वैज्ञानिकों ने पहले जो विश्‍लेषण किया था, उसकी तुलना में यह रिजल्‍ट कम था। बीजिंग में नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेट्री में कार्यरत लियू जियानजुन ने कहा कि Chang'e 5 के इक्विपमेंट ने वहां हाइड्रॉक्सिल की उपस्थिति को मापा, जो पानी का एक कर...

पूर्णिमा पर नजर आया ‘स्‍ट्रॉबेरी मून’, देखें ये शानदार तस्‍वीरें, आपको भी पसंद आएंगी!

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भारत समेत दुनियाभर के देशों में मंगलवार को सुपरमून ने आसमान को रोशन किया। हमारे लिए यह पूर्णिमा का चंद्रमा था, जबकि कई देशों में इसे सुपरमून, स्‍ट्रॉबेरी मून और यहां तक कि हनीमून भी कहा जाता है। यह इस साल का पहला सुपरमून था, जब‍ चंद्रमा, पृथ्‍वी के चारों ओर अपनी कक्षा के सबसे नजदीकी पॉइंट पर आया। इस वजह से पूर्णिमा का चांद काफी बड़ा और हल्‍का लाल रंग लिए हुए दिखाई दे रहा था। 14 जून को शाम 5.22 बजे से इसे देखा गया और लोगों ने सोशल मीडिया पर तस्‍वीरें शेयर कीं।  नासा के अनुसार, मंगलवार को चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में निकटतम बिंदु पर था। इसे पेरिगी (perigee) कहा जाता है। इसी वजह से चंद्रमा ‘सुपरमून' जैसा दिखाई दिया। इस दौरान चंद्रमा का आकार बड़ा और चमकीला नजर आया। देश के कई राज्‍यों में आसमान साफ होने पर लोगों ने इसका दीदार किया।  सुपरमून की इस प्रक्रिया में पृथ्‍वी और चंद्रमा के बीच की दूरी करीब 26 हजार किलोमीटर कम हो गई थी। इसी वजह से चांद का यह आकार दिखाई दिया। मंगलवार की पूर्णिमा का चंद्रमा बाकी महीनों की पूर्णिमा के मुकाबले 10 फीसदी ज्‍यादा रोशन दिखाई दिया।   जू...

मंगल ग्रह से ऐसे दिखते हैं पृथ्वी और चंद्रमा, NASA की इस अदभुत तस्वीर में देखें

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अंतरिक्ष से पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं, यह तो आपने कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने मंगल ग्रह से पृथ्वी और चंद्रमा का नाज़ारा देखा है? अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने अकसर खूबसूरत और हैरान करने वाली तस्वीरों को शेयर करता है और कुछ ऐसा ही एजेंसी ने एक बार फिर किया है। NASA ने अपने मार्स रिकोनिसेंस ऑर्बिटर पर हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरिमेंट (HiRISE) कैमरे से ली गई पृथ्वी और चंद्रमा की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें आप यह अनुभव कर सकते हैं कि मंगल ग्रह से हमारी पृथ्वी और चंद्रमा कैसे दिखते हैं।  NASA ने इस तस्वीर को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर शेयर किया गया है। पोस्ट में नासा ने लिखा (अनुवादित), "मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने पृथ्वी और चंद्रमा की इस झलक को कैद किया है। हमारे सात में से प्रत्येक रोबोट अब मंगल ग्रह पर काम कर रहे हैं, वास्तव में एक #NASAEarthling है, जो हमारी आंखों के रूप में कार्य करते हैं क्योंकि वे लाल ग्रह का पता लगाते हैं - हमारे नीले ग्रह के लिए हमारी समझ और प्रशंसा को गहरा करते हैं।"   Mars Reconnaissance Orbiter caught this glimpse of Earth a...

वैज्ञानिकों से हो गई ‘गलती’, चंद्रमा से SpaceX का रॉकेट नहीं, चीन का बनाया रॉकेट टकराएगा

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गलतियां सभी से होती हैं। वैज्ञानिकों से भी। एस्‍ट्रोनॉमी विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले महीने उन्‍होंने एक रहस्‍य को समझने में गलती की। यह गलती उस रॉकेट को लेकर हुई है, जो अगले महीने 4 मार्च को चंद्रमा की सतह से टकराएगा। पहले कहा गया था कि चंद्रमा में दुर्घटनाग्रस्त होने वाला रॉकेट SpaceX द्वारा बनाया गया था। अब पता चला है कि यह रॉकेट चीन ने बनाया है। यह रॉकेट 4 मार्च को चंद्रमा की सतह से टकराएगा। पहले कहा गया था कि वह SpaceX का फाल्‍कन-रॉकेट है। यह दावा एस्‍ट्रोनॉमर बिल ग्रे ने किया था। अब उन्‍होंने ही बताया है कि यह रॉकेट SpaceX का नहीं है। इसे चीन द्वारा बनाया गया था।  रॉकेट का नाम 2014-065B है, जो साल 2014 में लॉन्‍च किए गए चीनी मून मिशन ‘Chang'e 5-T1' का एक बूस्‍टर था। इस बारे में एस्‍ट्रोनॉमर जोनाथन मैकडॉवेल ने भी ट्वीट किया है। स्‍पेस में फैले कचरे को रेगुलेट करने की मांग के साथ वह अपना पक्ष रखते रहे हैं। जोनाथन ने कहा है कि अंतरिक्ष में चीजों की बेहतर ट्रैकिंग की कमी की वजह से यह समस्या है। खगोलविदों का कहना है कि उन्‍हें ऑर्बिट में कुछ अजीब चीजों पर ध्‍यान देना चा...

पहली बार चंद्रमा पर जाकर खोजा पानी, चीन के Chang'e 5 लुनर लैंडर की कामयाबी

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चंद्रमा पर गए चीन के Chang'e 5 लुनर लैंडर ने वहां पानी से जुड़े अहम सबूत की खोज की है। इस लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर पानी से जुड़ा पहला ऑन-साइट सबूत पाया है। यह बताता है कि आखिर पानी की मौजूदगी के बाद भी चंद्रमा सूखा क्‍यों है। पीयर-रिव्यू जर्नल साइंस एडवांस में शनिवार को पब्‍लिश हुई स्‍टडी से पता चला है कि चंद्रमा की लैंडिंग साइट पर मौजूद मिट्टी में 120 भाग-प्रति-मिलियन (ppm) पानी है। यानी एक टन मिट्टी में 120 ग्राम पानी है। हल्की और वेसिकुलर चट्टान में यहां पानी की मात्रा 180ppm है। यह पृथ्‍वी की तुलना में बहुत कम है। इस वजह से चंद्रमा अधिक शुष्क है। इससे पहले रिमोट ऑब्जर्वेशन के जरिए चंद्रमा में पानी की मौजूदगी की पुष्टि हो गई थी, लेकिन अब जाकर लैंडर ने वहां की चट्टानों और मिट्टी में पानी के लक्षण पाए हैं। लुनर लैंडर पर सवार एक डिवाइस ने रेजोलिथ (regolith) और चट्टान के स्पेक्ट्रल परावर्तन को मापा और पहली बार मौके पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया।  चाइनीज अकैडमी ऑफ साइंसेज (CAS) के रिसर्चर्स के हवाले से समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने बताया है कि पानी की मात्रा का अनुमान लगाया जा सक...

NASA ने सॉफ्ट टॉय को पहना दिए अंतरिक्ष यात्री के कपड़े, चांद पर जाने की पूरी तैयारी

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अगले साल की शुरुआत में चंद्रमा पर अपना पहला आर्टेमिस मिशन लॉन्‍च कर रही है, जो कई मायनों में खास होने वाला है। कॉमिक स्ट्रिप, 'पीनट्स' का मशहूर और दिल को छू लेने वाला कैरेक्‍टर 'स्‍नूपी' इस मिशन का हिस्‍सा होगा, यानी वो चंद्रमा पर जाएगा। इससे पहले 1969 में भी इस मानवरूपी बीगल यानी शिकारी को चंद्रमा के मिशन पर भेजा गया था और यह चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला दुनिया का पहला बीगल बना था। अब 60 साल बाद इतिहास खुद को दोहराएगा। इस बार यह काफी हद तक अलग होगा, क्‍योंकि यह स्‍टफ्ड स्‍नूपी, चंद्रमा के चारों ओर उड़कर, ओरियन स्‍पेसक्राफ्ट पर जीरो ग्रैविटी इंडिकेटर के रूप में काम करेगा यह एक मानवरहित मिशन है, जिसमें स्‍नूपी की जिम्‍मेदारी काफी अहम होने वाली है।  स्नूपी को नासा का ओरियन क्रू सर्वाइवल सिस्टम सूट पहनाया जाएगा। नारंगी रंग के इस सूट को उसी मटीरियल से बनाया गया है, जिस मटीरियल वाले सूट को भविष्य के आर्टेमिस मिशन पर एस्ट्रोनॉट द्वारा पहना जाएगा। नासा ने ट्विटर पर इस ड्रेस को पहने स्नूपी की एक फोटो शेयर करते हुए कहा है कि एस्ट्रोनॉट स्नूपी स्‍...

When, How to Watch, Visibility, वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहणः कब, कैसे देखें, विजिबिलिटी

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प्रमुख खगोलीय घटनाओं में शामिल सूर्य ग्रहण इस वर्ष अंतिम बार 4 दिसंबर को होगा। दक्षिणी गोलार्द्ध में लोग पूर्ण या आंशिक सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। चंद्रमा के सूर्य और धरती के बीच एक सीधी रेखा में स्थान लेने पर सूर्य ग्रहण होता है। इससे चंद्रमा की छाया धरती पर पूरी तरह या आंशिक तौर पर सर्य की रोशनी को रोक देती है। चंद्रमा की छाया के मध्य में रहने वाले लोग आसमान के गहरे रंग का होने पर पूर्ण ग्रहण देखते हैं। धरती पर पूर्ण सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर को सिर्फ Antarctica में दिखेगा। इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भारत से नहीं दिखेगा। सेंट हेलेना, नामीबिया, लेसोथो, दक्षिण अफ्रीका, साउथ जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड्स, क्रोजेट आइलैंड्स, फॉकलैंड आइलैंड्स, चिली, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में लोग आंशिक सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। ग्रहण का एरिया बड़ा होने के कारण अलग-अलग रीजन में यह सूर्योदय या सूर्यास्त से पहले, दौरान या बाद में होगा। इसका मतलब है कि सूर्योदय या सूर्यास्त के दौरान ग्रहण देखने के लिए लोगों को क्षितिज स्पष्ट तौर पर नजर आना जरूरी होगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने Union Glacier, Antarctica से स...