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रविवार 15 मई को होने जा रहा पूर्ण चंद्र ग्रहण, 'ब्लड मून' अनोखी खगोलीय घटना को ऐसे देखें लाइव

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वीकेंड पर चांद पूरी तरह से अंधरे में डूबने वाला है। इस दौरान एक बड़ी खगोलीय घटना का नजारा मिलने वाला है, जो काफी समय बाद देखने को मिलेगा। रविवार की रात से सोमवार की सुबह तक 2022 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होने जा रहा है। यह ग्रहण साउथ और नॉर्थ अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, अफ्रीका और ईस्ट पेसिफिक में दिखाई देगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण को कई बार ब्लड मून भी कहा जाता है क्योंकि ग्रहण के चरम पर यह गहरे लाल रंग का दिखता है। हालांकि, भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा।  चंद्र ग्रहण तब होता है, जब सूरज, धरती और चांद एक सीध में आ जाते हैं। इस स्थिति में चांद को धरती की छाया से गुजरना होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चांद धरती की छाया के सबसे अंधेरे हिस्से में चला जाता है जिसे अम्ब्रा कहा जाता है।  यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इच्छुक लोग नासा पर इसका लाइवस्ट्रीम देख सकते हैं। इसका समय 15 मई रात 11 बजे ET से 16 मई रात 12 बजे ET तक रहेगा। भारतीय समयानुसार यह सोमवार के सुबह 8.33 बजे का समय होगा। स्पेस एजेंसी इसका लाइव स्ट्रीम दिखाएगी और एक्सपर्ट्स इसके बढ़ने की प्रक्रिया पर कमेंट्री भी करेंगे।...

15 मई को पूर्ण चंद्र ग्रहण के दिन दिखेगा Blood Moon

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2022 का पहला चंद्र ग्रहण मई की 15 तारीख को होना है। यह 15 मई को देर शाम शुरू होगा और 16 मई की सुबह तक रहेगा। नासा इसे ब्लड मून (Blood Moon) कहता है। ऐसा क्यों होता है कि चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देने लगता है। हम आपको इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं कि च्रंद्र गहण कब होता है, ब्लड मून कब दिखता है और क्यों दिखता है।    कैसे होता है चंद्र ग्रहण? चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूरज और चांद के बीच आ जाती है। यानि कि 15 मई को जो चंद्र ग्रहण होने जा रहा है वह पृथ्वी के कारण होगा। इस घटना में चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ेगी और रात में चांद पर पड़ने वाली सूरज की रोशनी पृथ्वी के द्वारा रोक ली जाएगी। यह चंद्रग्रहण दुनिया के अधिकतर हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और चांद इस दिन लाल रंग में भी दिखाई देता है।  ब्लड मून कुछ सबसे खूबसूरत खगोलिय घटनाओं में आता है। इस बार 15 मई को होने वाला चंद्रग्रहम रात 10 बजकर 28 मिनट (EDT) पर शुरू होगा और 16 मई को 1 बजकर 55 मिनट (EDT) तक रहेगा। यह दुनिया के अधिकतर हिस्सों में दिखाई देगा लेकिन भारत में इसे नहीं देखा जा सकेगा। इसके ...

नासा की डराने वाली खबर! खो जाएगा धरती का इकलौता चांद, न होगी चांदनी, न दिखेगा सूर्य ग्रहण ...

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NASA ने एक डराने वाली खबर दी है। मंगल ग्रह का चंद्रमा एक दिन इसके करीब आते-आते इसकी सतह से टकरा जाएगा और धरती का चंद्रमा हमेशा के लिए धरती से दूर हो जाएगा। नासा ने कहा है कि मंगल ग्रह का चंद्रमा धीरे-धीरे इसकी सतह के करीब आ रहा है। इसी तरह से धरती का चंद्रमा इसकी सतह से धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है। इस गति का अंत ये होगा कि मंगल का चंद्रमा इसकी सतह से टकरा कर टुकडों में बिखर जाएगा और धरती की रातें एक समय बाद हमेशा के लिए अंधेरी हो जाएंगी।  हाल ही में नासा के पर्सवेरेंस रोवर ने मंगल के चंद्रमा फोबोस की शानदार तस्वीरे ली हैं। नासा ने इन्हें शेयर करने के साथ-साथ एक और तथ्य से पर्दा उठाया है। मंगल के दो चंद्रमा हैं- फोबोस और डीमोस। इसका फोबोस मून धीरे-धीरे लाल ग्रह की सतह के करीब आ रहा है। नासा ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में इसकी मंगल के करीब आने की चाल के बारे में भी बताया है। जिसके मुताबिक, फोबोस हर 100 साल में 6 फीट यानि 1.8 मीटर से मंगल के करीब सरकता जा रहा है। इस हिसाब से 5 करोड़ साल बाद यह मंगल की सतह से टकरा कर चूर चूर हो जाएगा। इसके उलट इसका दूसरा चांद डीमोस इससे दूर चला जाएग...

परसेवेरांस (Perseverance) ने मंगल ग्रह पर सूर्य ग्रहण का चित्र लिया

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First Published: April 25, 2022 | Last Updated:April 25, 2022 नासा के परसेवेरांस (Perseverance) मार्स रोवर ने मंगल के दो चंद्रमाओं में से एक फोबोस पर ग्रहण का वीडियो कैप्चर किया है। मुख्य बिंदु  परसेवेरांस (Perseverance) द्वारा कैप्चर किया गया यह वीडियो उच्चतम-फ्रेम-रेट अवलोकन है और सूर्य ग्रहण का सबसे ज्यादा ज़ूम-इन विडियो है जिसे मंगल ग्रह की सतह से कैप्चर किया गया है। इस मंगल ग्रहण ने वैज्ञानिकों को चंद्रमा की कक्षाओं में सूक्ष्म बदलाव के बारे में एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है। चंद्रमा फोबोस बहुत धीरे-धीरे मंगल की ओर बढ़ रहा है और वे अब से लाखों साल बाद आपस टकराएंगे। परसेवेरांस (Perseverance रोवर के उद्देश्य इस रोवर का एक मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह पर प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की तलाश करना है। यह रोवर मंगल की चट्टान, रेजोलिथ और धूल का विश्लेषण और अध्ययन कर रहा है। मार्स 2020 मिशन यह नासा के मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम द्वारा निर्मित मार्स रोवर है। इसमें ‘परसेवेरांस’ रोवर और एक ‘इन्जेयूटी’ हेलीकाप्टर ड्रोन शामिल हैं।  मिशन को 30 जुलाई...

NASA ने शेयर किया मंगल से दिखने वाले सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा

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आपने धरती से सूर्यग्रहण तो कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी मंगल ग्रह से सूर्य ग्रहण देखने के बारे में सोचा है? नासा की बदौलत यह मुमकिन हो सका है। नासा ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें मंगल ग्रह के दो चंद्रमाओं में से एक, सूर्य पर अपनी छाया डाल रहा है। यह मंगल ग्रह की सतह से देखा गया है। इस रोचक वीडियो को अंतरिक्ष एजेंसी के पर्सेवरेंस रोवर ने कैमरे में कैद किया है। इस दौरान लाल ग्रह का एक छोटा, आलू के आकार का चंद्रमा फोबोस (Phobos) मंगल और सूर्य के बीच आ गया था। "तुम सच्चे हो इसीलिए बहुत अच्छे हो। तुमसे नजरें नहीं हटाई जा रहीं।” नासा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा है।  ये ऑब्जर्वेशन वैज्ञानिकों को चंद्रमा के ऑर्बिट में होने वाली हल्की शिफ्ट को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रही हैं, जिससे पता चलता है कि कैसे इसकी ग्रेविटी मंगल ग्रह की दो ऊपर परतों क्रस्ट और मेंटल को आकार देती है। NASA के पर्सेवरेंस रोवर ने वीडियो कैप्चर करने के लिए 2 अप्रैल को अपने नेक्स्ट-जेनरेशन मास्टकैम-जेड कैमरे का इस्तेमाल किया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे एक छोटी वस्तु म...

When, How to Watch, Visibility, वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहणः कब, कैसे देखें, विजिबिलिटी

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प्रमुख खगोलीय घटनाओं में शामिल सूर्य ग्रहण इस वर्ष अंतिम बार 4 दिसंबर को होगा। दक्षिणी गोलार्द्ध में लोग पूर्ण या आंशिक सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। चंद्रमा के सूर्य और धरती के बीच एक सीधी रेखा में स्थान लेने पर सूर्य ग्रहण होता है। इससे चंद्रमा की छाया धरती पर पूरी तरह या आंशिक तौर पर सर्य की रोशनी को रोक देती है। चंद्रमा की छाया के मध्य में रहने वाले लोग आसमान के गहरे रंग का होने पर पूर्ण ग्रहण देखते हैं। धरती पर पूर्ण सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर को सिर्फ Antarctica में दिखेगा। इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भारत से नहीं दिखेगा। सेंट हेलेना, नामीबिया, लेसोथो, दक्षिण अफ्रीका, साउथ जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड्स, क्रोजेट आइलैंड्स, फॉकलैंड आइलैंड्स, चिली, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में लोग आंशिक सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। ग्रहण का एरिया बड़ा होने के कारण अलग-अलग रीजन में यह सूर्योदय या सूर्यास्त से पहले, दौरान या बाद में होगा। इसका मतलब है कि सूर्योदय या सूर्यास्त के दौरान ग्रहण देखने के लिए लोगों को क्षितिज स्पष्ट तौर पर नजर आना जरूरी होगा। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने Union Glacier, Antarctica से स...